स्वदेशी हथियार प्रणालियों जैसे तेजस लड़ाकू विमान, अर्जुन टैंक, आकाश मिसाइल प्रणाली, और INS विक्रांत जैसे स्वदेशी विमानवाहक पोत के निर्माण ने भारत की तकनीकी क्षमता को नई ऊंचाई दी है।“
भाजपा सरकार की रक्षा नीति का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि यह नीति व्यापक, रणनीतिक और आधुनिक है। सामरिक दृष्टिकोण, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और आंतरिक सुरक्षा पर केंद्रित यह नीति देशहित को प्राथमिकता देती है। ‘
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्र सरकार ने पिछले एक दशक में देश की रक्षा नीति को नई परिभाषा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने न केवल सैन्य दृष्टि से खुद को सशक्त बनाया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक आत्मनिर्भर और निर्णायक शक्ति के रूप में उभरा है। भाजपा की रक्षा नीति का मूल दर्शन “आत्मनिर्भर भारत” और “राष्ट्र सुरक्षा सर्वोपरि” पर केंद्रित रहा है।वर्ष 2014 के बाद से रक्षा बजट में निरंतर वृद्धि इस प्राथमिकता को दर्शाती है। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत का रक्षा बजट लगभग 6.2 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है, जो पिछले दशक की तुलना में लगभग 65% अधिक है। यह वृद्धि केवल संख्याओं का खेल नहीं, बल्कि उस रणनीतिक दृष्टिकोण का प्रतीक है जिसमें भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा, तकनीकी श्रेष्ठता और घरेलू उत्पादन पर जोर दे रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के शब्दों में — “भारत अब हथियारों का आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक देश बनने की राह पर है।”
सैन्य आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा
भाजपा सरकार ने तीनों सेनाओं — थलसेना, वायुसेना और नौसेना — के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। स्वदेशी हथियार प्रणालियों जैसे तेजस लड़ाकू विमान, अर्जुन टैंक, आकाश मिसाइल प्रणाली, और INS विक्रांत जैसे स्वदेशी विमानवाहक पोत के निर्माण ने भारत की तकनीकी क्षमता को नई ऊंचाई दी है।“मेक इन इंडिया” के अंतर्गत 2025 तक रक्षा उत्पादन में 1.75 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प लिया गया है। भारत आज 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है, जिसमें फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे दक्षिण एशियाई देश शामिल हैं। रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज हुई है — वर्ष 2014 में जहाँ यह मात्र 900 करोड़ रुपये था, वहीं 2024 में यह बढ़कर 21,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया।भाजपा सरकार ने रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया है। अब तक 600 से अधिक रक्षा कंपनियों को घरेलू उत्पादन के लिए लाइसेंस दिए जा चुके हैं। यह कदम न केवल रोजगार सृजन कर रहा है, बल्कि भारत को रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर बना रहा है।
रणनीतिक साझेदारी और विदेश नीति का आयाम
रक्षा नीति को केवल सैन्य शक्ति तक सीमित न रखकर भाजपा सरकार ने इसे विदेश नीति के एक महत्वपूर्ण अंग के रूप में विकसित किया है। अमेरिका, फ्रांस, रूस, इज़राइल और जापान के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी ने न केवल हथियार खरीद बल्कि तकनीकी सहयोग को भी नए स्तर पर पहुंचाया है।भारत-अमेरिका के बीच COMCASA और BECA जैसे समझौते, फ्रांस से राफेल विमान सौदा, और रूस से S-400 मिसाइल प्रणाली की प्राप्ति ने देश की सामरिक क्षमता को अभूतपूर्व बल दिया है। साथ ही, क्वाड गठबंधन (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) में सक्रिय भागीदारी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को निर्णायक बना दिया है।प्रधानमंत्री मोदी ने 2024 में सुरक्षा परिषद में कहा था — “भारत की सुरक्षा नीति अब प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि पहल की नीति है। हम संघर्ष नहीं, शांति के माध्यम से शक्ति प्रदर्शित करना चाहते हैं।” इस नीति ने भारत को एक जिम्मेदार और प्रभावशाली वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
आंतरिक सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और भविष्य की दिशा
भाजपा सरकार की रक्षा नीति का एक अन्य मजबूत स्तंभ आंतरिक सुरक्षा है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों को आतंकवाद-विरोधी अभियानों में अधिक स्वतंत्रता और तकनीकी सहायता प्रदान की है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), साइबर सुरक्षा डिवीजन और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है।इसके अलावा, साइबर युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी को भविष्य की रक्षा रणनीति का हिस्सा बनाया गया है। सरकार ने “डिफेंस इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन (DIO)” और “iDEX” प्लेटफॉर्म शुरू किए हैं, जो युवा वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स को रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रोत्साहित करते हैं।हालाँकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि रक्षा नीति को और सुदृढ़ करने के लिए अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है। भारत का रक्षा अनुसंधान खर्च अभी भी GDP का 0.7% है, जिसे बढ़ाकर 1.5% तक ले जाने की जरूरत है ताकि स्वदेशी तकनीकी क्षमता और भी मजबूत हो सके।भाजपा सरकार की रक्षा नीति का सार यह है कि भारत अब आत्मरक्षा से आगे बढ़कर आत्मनिर्भरता और वैश्विक शांति की दिशा में अग्रसर है। यह नीति केवल सैन्य दृष्टि से नहीं, बल्कि आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक दृष्टि से भी देश को सशक्त बना रही है।
मेरा संपादकीय दृष्टिकोण
भाजपा सरकार की रक्षा नीति का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि यह नीति व्यापक, रणनीतिक और आधुनिक है। सामरिक दृष्टिकोण, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और आंतरिक सुरक्षा पर केंद्रित यह नीति देशहित को प्राथमिकता देती है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार ने न केवल सेना को आधुनिक बनाया है, बल्कि देश की आर्थिक ताकत और तकनीकी क्षमता को भी बढ़ाया है।हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में रक्षा नीति में तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा और बहु-पक्षीय कूटनीति को और अधिक सुदृढ़ करना आवश्यक है। इसके बावजूद, वर्तमान भाजपा सरकार की रक्षा रणनीति ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया है कि भारत किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम और तैयार है।देशहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, यह संपादकीय यह निष्कर्ष निकालता है कि भाजपा की रक्षा नीति ने भारत को न केवल सामरिक दृष्टि से मजबूत किया है, बल्कि एक आत्मनिर्भर, सुरक्षित और सम्मानित राष्ट्र के रूप में दुनिया में प्रस्तुत किया है।देशहित के संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि भाजपा की रक्षा रणनीति ने भारत को “वैश्विक दक्षिण” से “वैश्विक निर्णायक शक्ति” में परिवर्तित करने की नींव रखी है। आज भारत न केवल अपनी सीमाओं की सुरक्षा करने में सक्षम है, बल्कि विश्व मंच पर एक विश्वसनीय रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है — यह स्वयं में एक सशक्त, आत्मनिर्भर और सुरक्षित भारत की पहचान है।
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