संपादक राम प्रकाश वत्स
Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित विश्व शिखर सम्मेलन में कहा कि आज पूरी दुनिया भारत को एक विश्वसनीय, जिम्मेदार और लचीले साझेदार के रूप में देखती है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और मोबाइल निर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश की लहर भारत में दौड़ रही है। ये निवेश भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनाने में मदद कर रहे हैं और इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय देशों के साथ हाल ही में हुए EFTA व्यापार समझौते का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता हुई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की हालिया यात्रा, जिसमें अब तक के सबसे बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ आए, इस बात का प्रमाण है कि दुनिया भारत में अवसरों की विशालता देख रही है। मोदी ने बताया कि जी-7 देशों के साथ भारत का व्यापार पिछले कुछ वर्षों में 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत रुकने का नाम नहीं लेगा। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीय पूरी गति से आगे बढ़ रहे हैं। दुनिया के कई देशों में आर्थिक और सामाजिक बाधाओं के बीच भारत का “अजेय” रूप स्पष्ट हो रहा है। मोदी ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने हर चुनौती को पार किया और अब नाज़ुक पाँच देशों में शामिल होकर शीर्ष पांच वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में स्थान बना लिया है।
उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति दो प्रतिशत से नीचे है और विकास दर सात प्रतिशत से अधिक है। आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा चिप्स से लेकर जहाजों तक हर क्षेत्र में स्पष्ट है। आतंकवाद के मामलों में भी भारत अब निर्णायक प्रतिक्रिया देता है, जैसे सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमले और अन्य अभियान।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “अज्ञात का किनारा दुनिया के लिए अनिश्चितता का प्रतीक हो सकता है, लेकिन भारत के लिए यह अवसरों का द्वार है।” उन्होंने बताया कि तकनीक, वैक्सीन निर्माण, कुशल जनशक्ति, वित्तीय तकनीक और हरित ऊर्जा में भारत ने हर जोखिम को अवसर में बदला है। पिछले 11 वर्षों में सरकार ने नीति और प्रक्रिया के लोकतंत्रीकरण पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे भारत का विकास मजबूत और अजेय बना।
मोदी ने बैंकिंग और वित्तीय समावेशन की भी उपलब्धियों का उल्लेख किया। 2014 में भारत की आधी से अधिक आबादी के पास बैंक खाता नहीं था, लेकिन अब हर गाँव में कम से कम एक बैंकिंग संपर्क बिंदु है। पिछले एक दशक में 50 करोड़ से अधिक जनधन खाते खोले गए हैं।
प्रधानमंत्री ने माओवादी और नक्सली आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2014 में 125 से अधिक जिले माओवादी हिंसा से प्रभावित थे, जो अब घटकर केवल 11 ज़िले रह गए हैं, जिनमें से तीन ज़िले अत्यधिक प्रभावित हैं। पिछले दशक में हज़ारों नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि नक्सलवाद और माओवादी हिंसा से मुक्त भारत का सपना जल्द साकार होगा। इस वर्ष दिवाली माओवादी आतंकवाद से मुक्त क्षेत्रों में नई उम्मीद और खुशियों के साथ मनाई जाएगी।

