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हिमाचल प्रदेश सरकार का समय पर लिया गया फैसला, प्रदेश हित में बड़ा कदम

RamParkash Vats
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने जल शक्ति विभाग में लगभग पाँच हजार से अधिक पदों को भरने का जो निर्णय लिया है, वह प्रदेश के प्रशासनिक ढाँचे और आर्थिक हित, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में चार घंटे चली लंबी बैठक में लिए गए इस फैसले से न केवल विभाग को मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रदेशवासियों को भी सीधा लाभ होगा।

*आर्थिक दृष्टि से राहतकारी कदम

अब तक सरकार जल शक्ति विभाग के लिए आउटसोर्सिंग प्रणाली पर 98 करोड़ रुपये खर्च कर रही थी। विभागीय स्तर पर पदों को भरने के बाद यह व्यय घटकर लगभग 25 करोड़ रुपये रह जाएगा। स्पष्ट है कि इससे सरकार को हर साल 70 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी। यह धनराशि अन्य विकास कार्यों या आपदा प्रभावित स्कीमों को बहाल करने में काम आ सकती है। इसके अलावा कर्मचारियों को ठेके पर मिलने वाले नाममात्र के वेतन के स्थान पर सम्मानजनक आय उपलब्ध होगी, जिससे कार्य की गुणवत्ता और स्थायित्व भी बढ़ेगा।

*रोजगार और संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण

कुल 4,852 पदों में से पंप ऑपरेटर, पैरा पंप और पैरा फिटर जैसे 1,726 पद सीधे तौर पर विभाग की कार्यक्षमता से जुड़े हैं। वहीं, वर्क इंस्पेक्टर, जेई, हाइड्रोलॉजिस्ट और करुणामूलक आधार पर भरे जाने वाले पद संगठन की तकनीकी और प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करेंगे। जल रक्षकों को अब आठ वर्षों बाद पदोन्नति देकर पंप अटेंडेंट बनाने का निर्णय भी कर्मचारी वर्ग में उत्साह और स्थिरता लाने वाला है।

*आपदा और जल संकट की चुनौती

प्राकृतिक आपदाओं के कारण जल शक्ति विभाग को 1,476 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और सात हजार जल योजनाएँ प्रभावित हुई हैं। ऐसे में नए पदों पर भर्ती और ठेके पर चल रही योजनाओं की समीक्षा का निर्णय विभाग को दीर्घकालिक समाधान की ओर ले जा सकता है। केंद्र से लंबित 1,227 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता शीघ्र प्राप्त होनी आवश्यक है। अन्यथा योजनाओं का पुनर्निर्माण बाधित होगा।

*सामाजिक व राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का उद्देश्य राजनीतिक लाभ नहीं, बल्कि वास्तविक समस्या का समाधान है। भाजपा द्वारा आपदा को राजनीतिक मुद्दा बनाने पर उप मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि मौजूदा हालात में सरकार विपक्ष के दबाव से अधिक जनता की तात्कालिक आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

*एचआरटीसी के संदर्भ में

बैठक में एचआरटीसी पेंशनरों के लिए भी राहत की घोषणा की गई है। हालाँकि निगम 96 घाटे वाले रूटों और मानसून से हुई बाधाओं के कारण संकट में है, फिर भी पेंशन और वेतन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता सकारात्मक संदेश देती है।अग्निहोत्री ने कहा कि एचआरटीसी के पेंशनरों को जल्द पेंशन दी जाएगी। मुख्यमंत्री के हिमाचल लौटते ही फाइल को मंजूरी दी जाएगी। एचआरटीसी कर्मचारियों और पेंशनरों को हर महीने वेतन दिया जा रहा है, लेकिन तारीख आगे पीछे हो रही है। उन्होंने कहा कि एचआरटीसी के 96 रूट घाटे में हैं। मानसून के चलते निगम की बसें खड़ी रहीं। इससे भी निगम को घाटा हुआ है।

, जल शक्ति विभाग में भर्ती और आउटसोर्सिंग पर नियंत्रण का यह निर्णय केवल रोजगार सृजन ही नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन, सेवा की गुणवत्ता और आपदा प्रबंधन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। यदि केंद्र से अपेक्षित धन समय पर मिल जाता है, तो यह फैसला हिमाचल प्रदेश के जल संसाधन प्रबंधन को नई दिशा देने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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