मछुआरों की आजीविका को मिलेगा संबल, मत्स्य संपदा के संरक्षण एवं संवर्धन पर विभाग का जोर

पौंग जलाशय में मत्स्य उत्पादन को नई गति देने और स्थानीय मछुआरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में मत्स्य विभाग हिमाचल प्रदेश ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग की ओर से पौंग जलाशय के जम्बल क्षेत्र में 2 लाख 37 हजार 516 ग्रास कार्प मत्स्य बीज का संचयन किया गया। इस पहल का उद्देश्य जलाशय की मत्स्य संपदा को समृद्ध करने के साथ-साथ भविष्य में मछुआरों के लिए आय के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाना है।
यह मत्स्य बीज संचयन कार्यक्रम संयुक्त निदेशक मत्स्य पालन पवन शर्मा के नेतृत्व में आयोजित किया गया।
इस दौरान सहायक निदेशक मत्स्य पालन पौंग बांध संदीप कुमार समिति के सदस्य के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, पर्यवेक्षक के रूप में सहायक निदेशक मत्स्य पालन ऊना विवेक शर्मा तथा सहायक निदेशक मत्स्य पालन शिमला राजेंद्र कुमार ने भी अपनी भूमिका निभाई।

ग्रास कार्प से बढ़ेगी जलाशय की मत्स्य विविधता:
संयुक्त निदेशक पवन शर्मा ने कहा कि पौंग जलाशय में ग्रास कार्प के बीज का संचयन मत्स्य संसाधनों के विकास की दिशा में एक अहम पहल है। ग्रास कार्प शाकाहारी मछली है, जो जलीय वनस्पतियों के नियंत्रण में भी सहायक होती है। इसके संचयन से जलाशय में मछलियों की विविधता बढ़ने और मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होने की संभावना है।
मछुआरों की आर्थिक मजबूती विभाग की प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि मत्स्य उत्पादन में बढ़ोतरी से आने वाले समय में मछुआरों को अधिक आर्थिक लाभ मिल सकता है, जिससे उनकी आजीविका को मजबूती मिलेगी। विभाग का लक्ष्य पौंग जलाशय के मत्स्य संसाधनों का संरक्षण करते हुए उनका वैज्ञानिक तरीके से बेहतर प्रबंधन करना है। मछुआरों के हितों को ध्यान में रखते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के मत्स्य बीज संचयन कार्यक्रम जारी रखे जाएंगे।

