मुख्यमंत्री को भेजा प्रस्ताव, पंचायत प्रधान ने राजनीति से ऊपर उठकर क्षेत्र के हित में निर्णय लेने की उठाई मांग

नूरपुर। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में नूरपुर को अलग जिला बनाने की मांग एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। इस दिशा में इन्नी ग्राम पंचायत ने पहल करते हुए नूरपुर को जिला घोषित करने की मांग के समर्थन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है। पंचायत की 17 अक्टूबर 2026 को आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया। पंचायत ने इस प्रस्ताव के माध्यम से हिमाचल प्रदेश सरकार से मांग की है कि नूरपुर तहसील को अलग जिला बनाने की दिशा में गंभीरता से विचार कर आवश्यक कदम उठाए जाएं। पंचायत की इस पहल को नूरपुर क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
पंचायत बैठक में सर्वसम्मति से लिया निर्णय
इन्नी ग्राम पंचायत केंद्र, विकास खंड नूरपुर, जिला कांगड़ा के कार्यालय से जारी प्रस्ताव संख्या 05 के अनुसार, पंचायत प्रधान विवेक सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में नूरपुर को जिला बनाने के विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। चर्चा के बाद पंचायत के सदस्यों ने एकमत होकर प्रस्ताव पारित किया कि नूरपुर को अलग जिला बनाने की मांग सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से रखी जाए।प्रस्ताव में कहा गया है कि नूरपुर को जिला बनाने की मांग केवल प्रशासनिक सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान, भौगोलिक परिस्थितियों, जनसंख्या और विकास की आवश्यकताओं से भी जुड़ी हुई है। पंचायत ने सरकार से आग्रह किया है कि इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नूरपुर को जिला बनाने पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
ऐतिहासिक पहचान को बताया जिला बनाने का प्रमुख आधार
पंचायत के प्रस्ताव में नूरपुर के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि नूरपुर एक ऐतिहासिक रियासत रही है। प्रस्ताव के अनुसार, इसका नाम नूरजहां बेगम से जुड़ा हुआ है और नूरपुर किले का भी अपना गौरवशाली इतिहास रहा है। पंचायत का मानना है कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को ध्यान में रखते हुए इसकी प्रशासनिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए।नूरपुर की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और क्षेत्रीय महत्व को देखते हुए पंचायत ने जिला बनाने की मांग को प्रमुखता से उठाया है। स्थानीय स्तर पर इस विषय को लंबे समय से उठाया जाता रहा है और पंचायत का यह प्रस्ताव उसी मांग को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास है।
भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक सुविधाओं का दिया हवाला
प्रस्ताव में नूरपुर की भौगोलिक स्थिति को भी जिला बनाने के पक्ष में महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। पंचायत के अनुसार, नूरपुर पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमाओं के समीप स्थित है, जबकि जिला मुख्यालय धर्मशाला यहां से लगभग 75 किलोमीटर दूर बताया गया है।पंचायत का तर्क है कि अलग जिला बनने से क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए बेहतर सुविधा मिल सकती है। जिला मुख्यालय तक पहुंचने में लगने वाले समय और दूरी को ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों को प्रशासनिक सेवाएं उनके नजदीक उपलब्ध करवाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।पंचायत का मानना है कि नूरपुर को जिला बनाने से प्रशासनिक कामकाज में सुविधा बढ़ सकती है और क्षेत्र के विकास से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
चार विकास खंडों और बड़ी आबादी का उल्लेख
इन्नी पंचायत द्वारा पारित प्रस्ताव में नूरपुर क्षेत्र की जनसंख्या और प्रशासनिक विस्तार का भी उल्लेख किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, पुलिस जिला नूरपुर के अंतर्गत नूरपुर, फतेहपुर, इंदौरा और जवाली सहित चार विकास खंडों का क्षेत्र आता है। पंचायत ने इस विस्तृत क्षेत्र की प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए अलग जिला बनाने की मांग रखी है।प्रस्ताव में करीब 400 गांवों और तीन लाख से अधिक आबादी का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि क्षेत्र का विस्तार और जनसंख्या प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। पंचायत का तर्क है कि इतने बड़े क्षेत्र की जनता को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए जिला स्तर पर व्यवस्थाएं विकसित करने पर विचार किया जाना चाहिए।
पहले से मौजूद प्रशासनिक ढांचे को बताया अनुकूल
पंचायत ने प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया है कि नूरपुर में पुलिस जिला, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, पुलिस लाइन, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश से जुड़ी व्यवस्था, लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग और अन्य विभागों के कार्यालय पहले से मौजूद हैं।पंचायत का मानना है कि इन संस्थानों और कार्यालयों की मौजूदगी जिला बनाने की संभावनाओं पर विचार करने के दौरान उपयोगी आधार बन सकती है। हालांकि, अलग जिला गठित करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक, वित्तीय और अन्य औपचारिकताओं का आकलन सरकार के स्तर पर किया जाना होगा।पंचायत ने उम्मीद जताई है कि मौजूदा प्रशासनिक ढांचे और क्षेत्र की जरूरतों का समग्र आकलन करके सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी।
तीन दशक पुरानी मांग का किया उल्लेख
इन्नी पंचायत के प्रस्ताव में नूरपुर को जिला बनाने की मांग को क्षेत्र के लोगों की लगभग 30 वर्षों से चली आ रही मांग बताया गया है। पंचायत के अनुसार, नूरपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को उम्मीद है कि अलग जिला बनने से प्रशासनिक सुविधाओं में सुधार होगा तथा विकास कार्यों को गति मिल सकेगी।पंचायत ने कहा है कि क्षेत्र की जनता की भावनाओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को इस मांग पर निर्णय लेना चाहिए। प्रस्ताव में मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि जनहित, प्रशासनिक सुविधा और क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए नूरपुर को अलग जिला बनाने की दिशा में आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जाए।
मुख्यमंत्री को भेजा प्रस्ताव, अब सरकार के निर्णय पर नजर
इन्नी ग्राम पंचायत ने सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव को हिमाचल प्रदेश सरकार के समक्ष भेजने की बात कही है। अब इस मांग पर सरकार की ओर से होने वाली कार्रवाई और निर्णय पर क्षेत्र के लोगों की निगाहें रहेंगी।पंचायत की इस पहल के साथ नूरपुर को जिला बनाने की मांग को आगे बढ़ाने के लिए अन्य पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषद के प्रतिनिधियों से भी अपील की गई है कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर क्षेत्र के हित में मुख्यमंत्री को प्रस्ताव भेजें।इस पहल का मुख्य उद्देश्य नूरपुर को जिला बनाने की मांग को व्यापक जनसमर्थन के साथ सरकार तक पहुंचाना है। हालांकि, इन्नी पंचायत का प्रस्ताव अपने आप में जिला गठन का निर्णय नहीं है। अंतिम फैसला राज्य सरकार को प्रशासनिक, वित्तीय और अन्य संबंधित पहलुओं पर विचार करने के बाद लेना होगा।
अब देखना यह होगा कि इन्नी पंचायत की यह पहल नूरपुर को जिला बनाने की लंबे समय से चली आ रही मांग को सरकार के समक्ष कितना प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा पाती है। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार होगा और नूरपुर के भविष्य को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

