स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सुभाष चंद ने विद्यार्थियों को दिया स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश, टीबी मुक्त और नशा मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने का किया आह्वान

नगरोटा सूरियाँ: Dr N,K Sharma: विश्व हृदय दिवस के अवसर पर खंड चिकित्सा अधिकारी नगरोटा सूरियाँ डॉ. अमन दुआ के निर्देशानुसार राजकीय महाविद्यालय नगरोटा सूरियाँ में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य अजय कुमार ने की। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को हृदय स्वास्थ्य के महत्व, टीबी रोग से बचाव, नशे के दुष्परिणामों और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूक किया गया।
स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सुभाष चंद ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही एक सफल एवं खुशहाल जीवन का आधार हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं के लिए अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाना आवश्यक है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने दैनिक जीवन में शारीरिक गतिविधियों को शामिल करें तथा तंबाकू, धूम्रपान और अन्य हानिकारक आदतों से दूर रहें।
सुभाष चंद ने कहा कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और बढ़ता कोलेस्ट्रॉल हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारक हैं। इसलिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या अचानक ठंडा पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति थोड़ी-सी जागरूकता और नियमित दिनचर्या अपनाकर कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
टीबी के प्रति जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
कार्यक्रम के दौरान टीबी मुक्त भारत अभियान के बारे में जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को बताया गया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और निर्धारित उपचार से इसका इलाज संभव है। लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना और भूख न लगना इसके संभावित लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवानी चाहिए।
स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सुभाष चंद ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे टीबी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने में सहयोग दें और इस बीमारी से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाएं। उन्होंने कहा कि बीमारी से लड़ने के लिए मरीजों को सही जानकारी, समय पर जांच और उपचार पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है। टीबी से प्रभावित किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। जागरूकता और सामूहिक सहयोग से ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
नशे से दूरी, उज्ज्वल भविष्य की जरूरी शर्त
नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों को तंबाकू, धूम्रपान, शराब और अन्य नशीले पदार्थों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि नशे की आदत न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि उसके परिवार, शिक्षा, सामाजिक संबंधों और भविष्य को भी प्रभावित कर सकती है।
सुभाष चंद ने युवाओं से नशे से दूर रहने और अपनी ऊर्जा को शिक्षा, खेलकूद, रचनात्मक कार्यों तथा सकारात्मक गतिविधियों में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और उनकी स्वस्थ सोच, मजबूत इच्छाशक्ति तथा जिम्मेदार व्यवहार से ही एक स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है। यदि किसी व्यक्ति को नशे की समस्या है, तो उसे छिपाने के बजाय उचित चिकित्सकीय या विशेषज्ञ सहायता लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे स्वयं स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और अपने परिवार तथा समाज में भी स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता फैलाएं। हृदय को स्वस्थ रखना, टीबी के लक्षणों के प्रति सजग रहना और नशे से दूर रहना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। सामूहिक प्रयासों से ही स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प साकार किया जा सकता है।कार्यक्रम में स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सुभाष चंद, ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर संदीप कुमार, सपन कुमार, टीबी सुपरवाइजर रुचि चौधरी और सोनिया देवी उपस्थित रहे।

