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हिमाचल में स्वतंत्र खनन निदेशालय का गठन, अवैध खनन पर अंकुश और राजस्व बढ़ाने की चुनौती

RamParkash Vats
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उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने नई उद्योग नीति, नए जिलों के गठन और औद्योगिक इकाइयों की स्थिति पर रखी सरकार की बात

शिमला– हिमाचल प्रदेश सरकार ने खनन गतिविधियों के प्रबंधन, राजस्व बढ़ाने और अवैध खनन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उद्योग विभाग से अलग स्वतंत्र खनन निदेशालय का गठन किया है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के अनुसार, सरकार खनन क्षेत्र को व्यवस्थित करने और नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रही है। हालांकि, इस पहल की सफलता निगरानी व्यवस्था की मजबूती, नियमों के पालन और अवैध खनन के मामलों में कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

प्रदेश में 450 के करीब क्रशर और खनन इकाइयां

उद्योग मंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग 450 क्रशर और खनन इकाइयां हैं। इनमें से करीब 25 इकाइयां हमेशा बंद रहती हैं, जबकि लगभग 300 से 350 इकाइयां चालू हालत में हैं। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में हिमाचल प्रदेश में खनन गतिविधियां कम हैं।खनन क्षेत्र से जुड़े इन आंकड़ों के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि चालू इकाइयों के संचालन, खनिजों की मांग, पर्यावरणीय मानकों और सरकारी राजस्व के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। स्वतंत्र निदेशालय के गठन से प्रशासनिक निगरानी में सुधार की उम्मीद की जा रही है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में सामने आएगा।

वन क्षेत्रों में खनन के लिए कानूनी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण

हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि वन क्षेत्रों में खनन से जुड़े मामलों को वन विभाग देखता है। ऐसे मामलों में वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के कारण अनुमति संबंधी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होती हैं। वहीं, निजी भूमि पर खनन की अनुमति निर्धारित नियमों के अनुसार दी जाती है।खनन गतिविधियों के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है। एक ओर खनन से सरकारी राजस्व और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर अनियंत्रित खनन से पर्यावरण, जल स्रोतों और स्थानीय बुनियादी ढांचे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में अनुमति प्रक्रिया, नियमित निरीक्षण और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की प्रभावशीलता अहम होगी।

नई उद्योग नीति से निवेश बढ़ाने की उम्मीद

उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जल्द ही नई उद्योग नीति लागू करने जा रही है। इसका उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में नए औद्योगिक निवेश को आकर्षित करना और मौजूदा उद्योगों को बनाए रखने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।उन्होंने कहा कि कुछ अन्य राज्य उद्योगपतियों को अधिक सुविधाएं और रियायतें दे रहे हैं, जिससे उद्योगों के दूसरे राज्यों की ओर जाने की परिस्थितियां बनती हैं। उनके अनुसार, औद्योगिक इकाइयों के बंद होने के पीछे अलग-अलग कारण होते हैं और इस विषय को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय वास्तविक परिस्थितियों का आकलन किया जाना चाहिए।नई उद्योग नीति की प्रभावशीलता इस बात से भी आंकी जाएगी कि इससे कितना नया निवेश आता है, मौजूदा इकाइयों को कितनी राहत मिलती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के कितने अवसर पैदा होते हैं। इसके साथ ही, उद्योगों को दी जाने वाली रियायतों और उनसे प्रदेश को होने वाले आर्थिक लाभ के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होगा।

उद्योगों के बंद होने पर अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल जरूरी

प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों के संचालन और बंद होने का मुद्दा आर्थिक एवं रोजगार संबंधी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उद्योग मंत्री ने इस संबंध में कहा कि प्रत्येक इकाई के बंद होने के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।ऐसे मामलों का आकलन करने के लिए बिजली और परिवहन की लागत, कच्चे माल की उपलब्धता, बाजार की स्थिति, श्रम संबंधी जरूरतों और सरकारी नीतियों जैसे पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है। उद्योगों के पलायन या बंद होने के कारणों पर स्पष्ट तस्वीर के लिए संबंधित आंकड़ों और औद्योगिक इकाइयों के अनुभवों का विस्तृत अध्ययन उपयोगी हो सकता है।

नए जिलों के गठन पर कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार

हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने के मुद्दे पर हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि इस संबंध में कमेटी गठित की गई है। कमेटी की रिपोर्ट आने और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही सरकार अगला निर्णय लेगी।उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी नए जिले बनाने की कवायद शुरू हुई थी। इस आधार पर उन्होंने भाजपा की आलोचना को अनुचित बताया।नए जिलों का गठन प्रशासनिक पहुंच और सरकारी सेवाओं की उपलब्धता से जुड़ा विषय है। इसके साथ ही, नए प्रशासनिक ढांचे के निर्माण पर होने वाला खर्च, कर्मचारियों की उपलब्धता, भौगोलिक परिस्थितियां और संबंधित क्षेत्रों की जरूरतें भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए कमेटी की रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकार के निर्णय पर इस मुद्दे की दिशा निर्भर करेगी।

सरकारी योजनाओं पर विपक्ष की आलोचना

कांग्रेस सरकार के कार्यक्रमों और योजनाओं को लेकर भाजपा की आलोचना पर उद्योग मंत्री ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार के कार्यों पर सवाल उठाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जनहित के कार्य जारी रखेगी।सरकार और विपक्ष के बीच नीतिगत मुद्दों पर मतभेद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। हालांकि, योजनाओं की सफलता का आकलन राजनीतिक बयानों के बजाय उनके क्रियान्वयन, वित्तीय प्रभाव और जनता को मिलने वाले लाभ के आधार पर किया जाना अधिक उपयोगी होगा।

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