सिरमौर / नौहराधार / कपिल शर्मा:राजकीय महाविद्यालय नौहराधार में सितंबर माह के प्रथम पखवाड़े में अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से प्रो. संगीता झागटा को चेयरपर्सन, अजय ठाकुर को प्रधान, कर्म दास को उपप्रधान, वेद प्रकाश को सचिव, हरदेव सिंह को सह-सचिव तथा कविता ठाकुर को कोषाध्यक्ष चुना गया। कार्यकारिणी सदस्यों में दीवान चंद, कार्तिक ठाकुर और ठाकुर सेन्दर नेगी को शामिल किया गया। वहीं अभिभावक सदस्यों के रूप में दिनेश कुमार, सुरजन सिंह और जयपाल सिंह का चयन किया गया

PTA उपप्रधान कर्म दास एवं अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2022-23 में अधिसूचित राजकीय महाविद्यालय नौहराधार क्षेत्र की दर्जनों पंचायतों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। नौहराधार के अलावा घंडूरी, देवना थंनगा, पुनरधार, भराडी , देवामानल, टोंडा, सेर तंदुला, भूटली मानल, भाटन भूजोंड, निहोग गवाई, शामरा और चोकर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

प्राथमिक विद्यालय के भवन में चल रहा कॉलेज
PTA पदाधिकारियों ने कॉलेज की मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि अधिसूचना के कई वर्ष बीतने के बावजूद महाविद्यालय अभी भी प्राथमिक विद्यालय के भवन में चल रहा है। कॉलेज के अपने भवन और आवश्यक आधारभूत ढांचे का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध करवाने में दिक्कतें सामने आ रही हैं।
केवल कला और वाणिज्य संकाय, करीब 100 से 110 विद्यार्थी
महाविद्यालय में वर्तमान में केवल कला और वाणिज्य संकाय संचालित हो रहे हैं। इनमें करीब 100 से 110 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। PTA का कहना है कि विज्ञान सहित अन्य संकाय शुरू किए जाने से क्षेत्र के अधिक विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा मिल सकती है और कॉलेज में छात्र संख्या भी बढ़ सकती है।
छह प्राध्यापकों के सहारे चल रहा कॉलेज, हिंदी का पद भी रिक्त
PTA प्रतिनिधियों के अनुसार महाविद्यालय में वर्तमान में मात्र छह प्राध्यापक कार्यरत हैं। वहीं हिंदी विषय के प्राध्यापक का पद रिक्त होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। PTA ने मांग की है कि हिंदी सहित सभी रिक्त पदों को शीघ्र स्थायी नियुक्तियों से भरा जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
प्राचार्य के स्थानांतरण के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल
PTA पदाधिकारियों ने कहा कि कॉलेज की स्थापना के बाद से व्यवस्थाओं को संभालने वाली प्राचार्य का तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद स्थानांतरण हो गया है। इसके बाद महाविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। PTA ने कॉलेज में नियमित प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
दूरदराज के कॉलेजों में जाने को मजबूर विद्यार्थी
PTA का कहना है कि भवन, आधारभूत सुविधाओं, पर्याप्त संकाय और शिक्षकों की कमी के कारण क्षेत्र के विद्यार्थियों को सोलन, नाहन और शिमला जैसे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। PTA ने चेताया कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो महाविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या पर भी इसका असर पड़ सकता है।
सरकार और शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
PTA कार्यकारिणी एवं क्षेत्रवासियों ने प्रदेश सरकार, शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन से महाविद्यालय के भवन निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू करवाने, हिंदी सहित सभी रिक्त प्राध्यापक पदों को भरने तथा विज्ञान समेत नए संकाय शुरू करने की मांग की है। PTA का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में खोले गए इस महाविद्यालय को पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करवाकर ही विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का वास्तविक लाभ मिल सकेगा।

