2016 में 4.88 करोड़ की लागत से शुरू हुआ भवन एक दशक बाद भी बना सवाल, जनता पूछ रही—जवाबदेही तय होगी कब और किसकी?
24 पंचायतों की स्वास्थ्य जरूरतों का केंद्र, दो बिस्तरों की सीमित सुविधा से वर्षों जूझती रही जनता; अब नए भवन से बेहतर उपचार की उम्मीद

विकास की असली तस्वीर सरकारी दावों और विज्ञापनों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली सुविधाओं से सामने आती है। सिरमौर जिले के नौहराधार में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का भवन करीब एक दशक तक निर्माणाधीन रहना इसी सवाल को सामने लाता है कि आखिर जनहित की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा होने में इतना लंबा समय क्यों लग जाता है? सरकारें प्रदेश में चहुंमुखी विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की बात करती रही हैं, लेकिन जब किसी मूलभूत स्वास्थ्य सुविधा का भवन वर्षों तक अधूरा रहे तो स्वाभाविक रूप से जनता सवाल पूछती है—क्या इसी को विकास कहते हैं?
वर्ष 2016 में लगभग 4.88 करोड़ रुपये की लागत से इस भवन का निर्माण शुरू हुआ था। इसकी आधारशिला तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने रखी थी। लेकिन निर्माण कार्य समय पर पूरा न होने के कारण क्षेत्र की जनता को वर्षों तक सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर रहना पड़ा। मौजूदा सीएचसी में केवल दो बिस्तरों की व्यवस्था होने की बात सामने आई है। ऐसे हालात में मरीजों को पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग के लिए भी चुनौती बन जाता है।
क्षेत्र की करीब 24 पंचायतों के अलावा हरिपुरधार और शिमला जिले के कुपवी क्षेत्र के लोग भी इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। संसाधनों की कमी के चलते गंभीर अथवा अधिक सुविधाओं की आवश्यकता वाले मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल केवल भवन के अधूरा रहने का नहीं, बल्कि जनता के धन और समय की कीमत का है। वर्ष 2016 में जिस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 4.88 करोड़ रुपये थी, वह अब बढ़कर करीब 6.91 करोड़ रुपये बताई जा रही है। स्वाभाविक है कि इतने वर्षों में निर्माण सामग्री, श्रम और अन्य लागतों में वृद्धि हुई होगी। इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ अंततः सरकारी खजाने और अप्रत्यक्ष रूप से करदाताओं पर ही पड़ता है।
यह धन किसी एक व्यक्ति या सरकार का नहीं, बल्कि जनता के टैक्स से बना सार्वजनिक धन है। इसलिए प्रत्येक सरकारी परियोजना की समयबद्धता और जवाबदेही केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि जनहित का विषय है।हालांकि अब विभाग के अनुसार भवन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और करीब 6.91 करोड़ रुपये की लागत से पांच मंजिला भवन तैयार किया गया है। इसमें लिफ्ट और पार्किंग जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। नए भवन में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी, ओपीडी, ऑपरेशन थियेटर, मीटिंग हॉल और विशेष वार्ड जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने की बात कही गई है। यदि ये सुविधाएं पूरी क्षमता के साथ संचालित होती हैं तो निश्चित रूप से नौहराधार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
अब जनता की अपेक्षा केवल भवन बनने तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों की मांग है कि तैयार भवन का उद्घाटन शीघ्र कराया जाए और स्वास्थ्य सेवाओं को बिना अनावश्यक देरी के नए भवन में स्थानांतरित किया जाए। लोगों ने विधायक विनय कुमार से भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हाथों भवन का उद्घाटन करवाने की अपील की है।
नौहराधार का यह मामला किसी एक दल या सरकार को कठघरे में खड़ा करने से अधिक व्यवस्था की जवाबदेही का प्रश्न है। सरकार चाहे किसी भी दल की हो, उसका नैतिक दायित्व है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर समय पर पूरा करे। जनता के धन से बनने वाली योजनाएं वर्षों तक अधूरी न रहें, इसके लिए निर्माण की निगरानी, जिम्मेदारी तय करने और समयसीमा का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।नौहराधार का नया भवन अब तैयार है तो उम्मीद की जानी चाहिए कि करीब दस वर्षों का इंतजार यहीं समाप्त होगा। जनता को अब उद्घाटन की औपचारिकता से अधिक पूरी क्षमता के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन का इंतजार है। यही किसी भी विकास परियोजना की वास्तविक सफलता होगी।

