शिरगुल महाराज मंदिर, आश्रम, दुकानें और सराय सिरमौर के जनगणना रिकॉर्ड में शामिल
दो दिन चला अभियान, ऑनलाइन रिकॉर्ड में कुल आबादी 9 दर्ज

सिरमौर। प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल चूड़धार को लेकर प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र के संबंध में लंबे समय से चर्चा के बीच सिरमौर प्रशासन की ओर से पहली बार यहां जनगणना कार्य करवाया गया है। प्रशासनिक टीम ने दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच 12 से 13 सितंबर तक चूड़धार पहुंचकर जनगणना प्रक्रिया पूरी की।

जनगणना से जुड़े ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार सिरमौर जिले के अंतर्गत चूड़धार क्षेत्र में मंदिर, आश्रम, दुकानें और सराय समेत कुल 25 सेंसस हाउस दर्ज किए गए हैं। इन रिकॉर्ड में प्रसिद्ध शिरगुल महाराज मंदिर भी शामिल है। दर्ज विवरण के अनुसार क्षेत्र की कुल आबादी 9 बताई गई है।
जनगणना कर्मचारियों के अनुसार 12 और 13 सितंबर को चूड़धार में जनगणना का कार्य पूरा किया गया। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण टीम को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। प्रशासन की इस कार्रवाई को चूड़धार के क्षेत्राधिकार से जुड़े दस्तावेजी रिकॉर्ड की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दर्ज विवरण में शिरगुल महाराज मंदिर के अलावा स्वामी जी का आश्रम, विभिन्न दुकानें तथा सराय आदि भी शामिल हैं। वहीं चूड़ेश्वर सेवा समिति की धर्मशाला शिमला जिले के प्रशासनिक क्षेत्र में आती है, जिससे चूड़धार क्षेत्र में दोनों जिलों की प्रशासनिक सीमाओं का पहलू भी सामने आता है।
चूड़धार धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है और शिरगुल महाराज को लेकर सिरमौर सहित आसपास के क्षेत्रों में गहरी धार्मिक मान्यता है। ऐसे में सिरमौर प्रशासन द्वारा जनगणना रिकॉर्ड में मंदिर समेत अन्य परिसरों को दर्ज किया जाना भविष्य में क्षेत्र की प्रशासनिक सीमाओं और उपलब्ध सरकारी अभिलेखों के संदर्भ में महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा सकता है।

हालांकि, केवल जनगणना में किसी भवन या संस्थान का दर्ज होना अपने आप में भूमि स्वामित्व अथवा अंतिम कानूनी अधिकार क्षेत्र का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। वास्तविक प्रशासनिक सीमा और अधिकार क्षेत्र का निर्धारण संबंधित राजस्व, अधिसूचनाओं, सीमा अभिलेखों तथा अन्य सरकारी दस्तावेजों के आधार पर होता है।फिलहाल चूड़धार की जनगणना से संबंधित आंकड़ों ने इस क्षेत्र को लेकर चल रही चर्चा को एक नया दस्तावेजी आधार जरूर दिया है।

