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नकली दवा निर्माण और करोड़ों की जीएसटी चोरी के आरोपों पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को नोटिस

RamParkash Vats
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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नकली दवाइयों के कथित निर्माण, फर्जीवाड़े, फार्मास्युटिकल कच्चे माल की अवैध सप्लाई और बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी से जुड़े मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और संबंधित फार्मा कंपनी के संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु की खंडपीठ ने अनमोल सिंह राणा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्तूबर को निर्धारित की गई है।

जनहित याचिका में पूरे मामले को सार्वजनिक हित से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए आरोप लगाया गया है कि फार्मास्युटिकल कारोबार की आड़ में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। याचिका के अनुसार इस कथित नेटवर्क में करीब 27 से 28 टन फार्मास्युटिकल कच्चे माल की अवैध सप्लाई, धोखाधड़ी और बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी से संबंधित गतिविधियां सामने आई हैं। याचिकाकर्ता ने इस मामले में कथित तौर पर अर्जित काले धन की जांच किए जाने की आवश्यकता भी अदालत के समक्ष उठाई है।

याचिका में संबंधित फार्मा कंपनी के निदेशकों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि कंपनी के संचालकों ने करीब 275 किलोग्राम कथित नकली दवा ‘एक्सप्लोटैब’ के बिक्री रिकॉर्ड को छिपाया। इसके अलावा याचिका में दावा किया गया है कि बिना वैध लाइसेंस के भारी मात्रा में दवाइयों के निर्माण का काम किया गया। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 सहित संबंधित कानूनों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ सकता है।

मामले के दस्तावेजों में यह भी बताया गया है कि ड्रग विभाग ने जुलाई 2023 में संबंधित कंपनी का थोक दवा लाइसेंस रद्द कर दिया था। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी। याचिका के अनुसार आरोपियों की ओर से हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद जनवरी 2024 में नालागढ़ की अदालत ने आरोपियों को भगोड़ा घोषित कर दिया था।

इस मामले में जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका में उल्लेख किया गया है कि स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने 1 जुलाई 2026 को एक पत्र के माध्यम से इस जटिल वित्तीय मामले की जांच में व्यावहारिक कठिनाइयों की जानकारी दी थी। बताया गया कि मामले की जांच के लिए आवश्यक मैनपावर, संसाधनों और राजस्व विभाग के कार्यक्षेत्र से जुड़े तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण इतनी जटिल वित्तीय हेराफेरी की जांच करना चुनौतीपूर्ण है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि मामला केवल कथित नकली दवाइयों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कथित तौर पर कच्चे माल की सप्लाई, दवाइयों के उत्पादन, बिक्री रिकॉर्ड, कर व्यवस्था और वित्तीय लेनदेन की कई कड़ियां जुड़ी हुई हैं। ऐसे में पूरे मामले की व्यापक और स्वतंत्र जांच आवश्यक है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित अवैध गतिविधियों से किस स्तर तक आर्थिक लाभ हासिल किया गया और सरकारी राजस्व को कितना नुकसान पहुंचा।

जनहित से जुड़ा मामला होने के कारण गंभीरता बढ़ी

नकली दवाइयों से संबंधित मामले सामान्य वित्तीय अपराधों से अलग होते हैं, क्योंकि इनका सीधा संबंध आम लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से भी हो सकता है। यदि किसी दवा का निर्माण निर्धारित मानकों और वैध लाइसेंस के बिना किया जाता है तो उससे मरीजों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इसी कारण याचिकाकर्ता ने मामले को जनहित से जोड़ते हुए अदालत के समक्ष व्यापक जांच की मांग रखी है।

वहीं, कथित जीएसटी चोरी का पहलू सरकारी राजस्व से संबंधित है। यदि किसी कारोबार में बिक्री या उत्पादन से जुड़े वास्तविक रिकॉर्ड छिपाकर कर देनदारी कम दिखाई जाती है, तो इसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ता है। इसलिए याचिका में कथित वित्तीय अनियमितताओं के साथ-साथ काले धन और धन के प्रवाह की जांच की मांग भी की गई है।

हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि याचिका में लगाए गए आरोप अदालत ने सही मान लिए हैं। अदालत ने संबंधित पक्षों से उनका पक्ष और जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार तथा अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल हाईकोर्ट के इस आदेश से नकली दवाइयों के कथित कारोबार, फार्मास्युटिकल कच्चे माल की सप्लाई और जीएसटी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच और जवाबदेही का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। 7 अक्तूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और संबंधित पक्ष अदालत के समक्ष क्या जवाब दाखिल करते हैं तथा जांच को लेकर आगे क्या दिशा सामने आती है।

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