शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारियों के हित में अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि नियुक्ति भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत विज्ञापन, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार जैसी निर्धारित चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद स्वीकृत पदों पर की गई है, तो नियमितीकरण के बाद उनकी पूरी अनुबंध अवधि को सेवा लाभों के लिए गिना जाएगा।

न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने कहा कि निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त कर्मचारियों की अनुबंध अवधि को सेवा लाभों से अलग नहीं किया जा सकता। ऐसे कर्मचारियों को वरिष्ठता, वार्षिक वेतन वृद्धि, वेतन निर्धारण, पदोन्नति और पेंशन सहित अन्य पात्र सेवा लाभ प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से दिए जाने चाहिए।
मामला मनोज कुमार, अजय कुमार और भूपेंद्र पाल की ओर से दायर विभिन्न याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2010 में जारी विज्ञापन के आधार पर भाषा अध्यापक, टीजीटी (मेडिकल) और ड्रॉइंग मास्टर के पदों के लिए आवेदन किया था। उन्होंने लिखित परीक्षा और साक्षात्कार की निर्धारित प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की थी।
इसके बावजूद सरकार ने उन्हें तत्काल नियमित नियुक्ति देने के बजाय वर्ष 2012 में 13,500 रुपये के निश्चित वेतन पर अनुबंध आधार पर नियुक्त किया। बाद में उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं, लेकिन अनुबंध अवधि को वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों में शामिल नहीं किया गया। कर्मचारियों ने इसी निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
अदालत ने सरकार को आदेश की प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर सभी देय वित्तीय लाभों का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर बकाया राशि पर भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
यह फैसला प्रदेश के उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनकी नियुक्ति निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के बाद अनुबंध आधार पर हुई थी और बाद में उन्हें नियमित किया गया।

