नूरपुर से चीफ ब्यूरो, संसदीय क्षेत्र कांगड़ा-चंबा — विनय महाजन
देश की स्वतंत्रता के इतिहास में वीर राम सिंह पठानिया का नाम नूरपुर ही नहीं, बल्कि हिमाचल की वीर परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। बावजूद इसके, क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस महान स्वतंत्रता सेनानी और शहीद को वह राष्ट्रीय एवं राजकीय सम्मान आज तक नहीं मिल पाया, जिसकी लंबे समय से मांग उठती रही है। अब विधानसभा सत्र के बीच एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि क्या सरकार और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को सदन में उठाएंगे?
हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायत वासा वजीरा के उपप्रधान सतपाल ने एक भेंटवार्ता में कहा कि वीर राम सिंह पठानिया के इतिहास और उनके बलिदान से विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया भी पूरी तरह परिचित हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष वीर राम सिंह पठानिया की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा परिसर में उनका चित्र लगाने का आश्वासन दिया था। ऐसे में क्षेत्र की जनता अब इस आश्वासन के अमल का इंतजार कर रही है।
सतपाल ने कहा कि पूर्व उपप्रधानमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी जब रथयात्रा के दौरान नूरपुर पहुंचे और वीर राम सिंह पठानिया स्मारक में आयोजित जनसभा में शामिल हुए थे, तब उन्होंने भी उनके सम्मान में लोकसभा और राज्यसभा में चित्र लगाने की बात कही थी। हालांकि, क्षेत्रवासियों के अनुसार, यह मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी।

ग्राम पंचायत वासा वजीरा के उपप्रधान सतपाल ने एक भेंटवार्ता
उन्होंने कहा कि हिमाचल में समय-समय पर विभिन्न सरकारें सत्ता में आईं, लेकिन वीर राम सिंह पठानिया के सम्मान और उनके इतिहास को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं हो पाए। नूरपुर से निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचने वाले विधायकों से भी लोगों को उम्मीद रही कि वे इस विषय को सदन में मजबूती से उठाएंगे।
हर वर्ष वीर राम सिंह पठानिया की पैतृक भूमि वासा में उनकी जयंती मनाई जाती है। वहीं पंजाब में भी उनकी जयंती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को उनके संघर्ष और बलिदान की जानकारी दी जाती है। क्षेत्रवासियों का सवाल है कि हिमाचल में भी उनके इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए व्यापक पहल क्यों नहीं की गई?
पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के कार्यकाल में नूरपुर में वीर राम सिंह पठानिया के नाम पर स्मारक विकसित करने की योजना बनाई गई थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिवंगत कार्यकर्ता बलदेव परमार सहित अनेक लोगों के प्रयासों से स्मारक का निर्माण हुआ। स्मारक परिसर में भवन सहित अन्य सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार विकास कार्य अभी भी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है।
वीर राम सिंह पठानिया के नाम को लेकर नूरपुर में राजनीतिक चर्चा भी होती रही है। चौगान खेल मैदान का नाम कभी उनके नाम पर रखा गया था, लेकिन वर्तमान में इसे अटल स्टेडियम के नाम से जाना जाता है। डीएसपी आवास के समीप घोड़े पर सवार उनकी प्रतिमा भी स्थापित है, जिसे स्मारक समिति के प्रयासों का परिणाम बताया जाता है।
क्षेत्रवासियों की निगाहें अब वर्तमान विधानसभा सत्र पर टिकी हैं। कांगड़ा-चंबा के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज से भी शहीद परिवारों और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि वे इस विषय को संसद में उठाने का प्रयास करेंगे। वहीं नूरपुर के विधायक रणवीर सिंह निक्का से भी सवाल उठ रहा है कि क्या वे विधानसभा में वीर राम सिंह पठानिया के सम्मान से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे?
अब मूल प्रश्न यही है कि क्या दलगत राजनीति से ऊपर उठकर वीर राम सिंह पठानिया के इतिहास, सम्मान और स्मृति को उचित स्थान दिलाने के लिए विधानसभा में सार्थक चर्चा होगी? नूरपुर की जनता इस सवाल का जवाब वर्तमान विधानसभा सत्र से चाहती है।

