
नेपालापुर निवासी 82 वर्षीय हरिप्रसाद रस्तोगी पुत्र राजा राम रस्तोगी के निधन के बाद उनके परिवार ने मानवता और परोपकार की अनूठी मिसाल पेश करते हुए नेत्रदान कराया। उनके निधन की सूचना के बाद भारत विकास परिषद सीतापुर के सचिव जितेंद्र कुकरेजा ने उनके पुत्र दिनकर रस्तोगी से संपर्क कर नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। परिवार की सहमति मिलने के बाद सक्षम संस्था के अध्यक्ष संदीप भरतीया को इसकी सूचना दी गई।
संदीप भरतीया ने तत्काल आंख अस्पताल सीतापुर से चिकित्सकों की टीम को नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए रात्रि में नेत्रदानी के आवास पर भेजा। चिकित्सकों की टीम में डॉ. अरुणेश मिश्रा, डॉ. रितु, रघुनंदन, हरिओम और सायदा शामिल रहे। टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर नेत्रदान संपन्न कराया।
इस अवसर पर सक्षम संस्था के महामंत्री मुकेश अग्रवाल ने कहा कि नेत्रदानी हरिप्रसाद रस्तोगी की आंखों से अब दो जरूरतमंद लोग दोबारा इस खूबसूरत संसार को देख सकेंगे। उन्होंने कहा कि नेत्रदान मानवता और परोपकार का अनमोल उदाहरण है। नेत्रदानी परिवार ने समाज को यह संदेश दिया है कि मृत्यु के बाद भी अंगदान के माध्यम से किसी के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है।
उन्होंने बताया कि सक्षम संस्था नेत्रदान के प्रति लोगों को लगातार जागरूक कर रही है। संस्था के अध्यक्ष संदीप भरतीया, सुभाष अग्निहोत्री, विकास अग्रवाल, अक्षत अग्रवाल सहित संस्था के पदाधिकारियों से संपर्क कर किसी भी समय नेत्रदान की सूचना दी जा सकती है। सूचना मिलने के बाद चिकित्सकों की टीम लगभग 30 मिनट के भीतर नेत्रदानी के आवास पर पहुंचकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करती है।
मुकेश अग्रवाल ने बताया कि सीतापुर जिले के किसी भी क्षेत्र से नेत्रदान की सूचना मिलने पर चिकित्सकों की टीम समय से नेत्रदानी के आवास पर पहुंचती है। सक्षम संस्था द्वारा कराया गया यह 283वां नेत्रदान है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि नेत्रदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाएं और मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी लाने के इस पुनीत कार्य में आगे आएं।

