नूरपुर से संसदीय क्षेत्र कांगड़ा-चंबा ब्यूरो चीफ — विनय महाजन
नूरपुर क्षेत्र को प्रदेश के महत्वपूर्ण और चर्चित क्षेत्रों में गिना जाता है, लेकिन विकास की चमक के पीछे यहां की कई मूलभूत समस्याएं आज भी जनसाधारण के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।
नगर परिषद और पंचायत की सीमा से सटा यह क्षेत्र बरसात के दिनों में विशेष रूप से चर्चा में आ जाता है। सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक दिखाई नहीं देता।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस मार्ग से सरकारी कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारी, आईटीआई के विद्यार्थी और शिक्षक प्रतिदिन आवागमन करते हैं। आपात स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों को भी इसी अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है। सड़क की खराब स्थिति के कारण लोगों को सीधे रास्ते के बजाय उतराई-चढ़ाई पार कर शहर का लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत प्रशासन और नगर प्रशासन द्वारा संबंधित विभागों को कई बार समस्या से अवगत करवाया गया तथा कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस है। सवाल यह है कि आखिर जनता की इस रोजमर्रा की परेशानी का स्थायी समाधान कब होगा?
प्रधानमंत्री और प्रदेश सरकार के ‘अच्छे दिन’ तथा विकास के दावों के बीच नूरपुर की यह समस्या व्यवस्था से सीधा सवाल पूछ रही है। जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग को राजनीति से ऊपर उठकर इस क्षेत्र की सड़क, स्वास्थ्य और आवागमन व्यवस्था को प्राथमिकता देनी होगी। जनता केवल आश्वासन नहीं, धरातल पर काम और राहत चाहती है।

