
**डाक्टर संजीव गुलेरीया प्रदेश अध्यक्ष न्यु पेंशन स्कीम (दस वर्ष से कम सेवाकाल वाले) सेवानिवृत कर्मचारी अधिकारी महासंघ हिमाचल प्रदेश ने आज प्रैस को संबोधित करते हुए कहा कि आज कर्मचारियों और अधिकारियों का वर्ग स्वयं अपनी अनदेखी का जिम्मेदार बनता जा रहा है। सेवारत कर्मचारी और अधिकारी हर विभाग में अलग-अलग एसोसिएशन बनाकर केवल अपनी ‘नेतागिरी’ चमका रहे हैं। सत्ता बदलने के साथ ही अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ दो-दो गुटों में बंट जाता है। दोनों ही गुट खुद को असली बताकर सरकार की जी-हुजूरी में लग जाते हैं। इस आपसी खींचतान और राजनीतिक परिक्रमा के कारण कर्मचारियों के वाजिब हक, जैसे समय पर डी.ए. (DA) का भुगतान और अन्य वित्तीय लाभ, आज तक लटके हुए हैं।* *सेवानिवृत्त होने के बाद भी अधिकारी पेंशनर्स एसोसिएशन के नाम पर अपनी निजी महत्वाकांक्षाएं ही पूरी कर रहे हैं।**डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि आउटसोर्सिंग भर्तियां द्वारा युवाओं का शोषण और संवैधानिक संस्थाओं का अनादर किया जा रहा है।**हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरियां देने के नाम पर युवाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है।* *लोक सेवा आयोग (शिमला) और राज्य चयन आयोग (हमीरपुर) जैसी पारदर्शी संस्थाओं को दरकिनार कर दिया गया है।**आउटसोर्सिंग भर्ती प्रक्रिया केवल राजनीतिक पहुंच वाले लोगों और बिचौलियों को फायदा पहुंचाने का जरिया बन चुकी है।**डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि सरकारें नियमित सरकारी नौकरियां देने में पूरी तरह फिसड्डी साबित हुई हैं। आउटसोर्सिंग के नाम पर युवाओं को कम वेतन में अनिश्चित भविष्य की ओर धकेला जा रहा है, जो सीधे तौर पर युवाओं का आर्थिक और मानसिक शोषण है।**डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि आउटसोर्सिंग में कार्यरत कर्मचारियों की सेवा को नियमित किया जाए और आउटसोर्सिंग प्रथा को तुरंत बंद कर सभी विभागों में खाली पड़े पदों को लोक सेवा आयोग और चयन आयोग के माध्यम से ही पूरी पारदर्शिता से भरा जाए।**डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि मुफ्त की राजनीति (1500 रुपये व 300 यूनिट बिजली) की चुनाव आते ही राजनीतिक दल फिर से जनता को गुमराह करने के ढोंग में जुट गए हैं। उन्होंने कहा कि 1500 रुपये महीना देने और 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के दावों की सच्चाई जनता देख चुकी है। पिछले चुनावी वादे आज तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाए हैं।**डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना बंद करे सरकारें, न तो सत्ताधारी दल और न ही विपक्ष इस बात पर आत्म-मंथन कर रहा है कि बढ़ती महंगाई पर लगाम कैसे लगाई जाए ? और शिक्षित युवाओं को पक्का रोजगार कैसे दिया जाए ?* *मुफ्त की खैरात बांटने का वादा करके जनता को निकम्मा बनाया जा रहा है, जबकि युवाओं को रोजगार और सम्मानजनक आजीविका की जरूरत है।**डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि समय की मांग है कि राज्य का कर्मचारी वर्ग अपनी आपसी गुटबाजी को छोड़कर एकजुट हो और राजनीतिक दलों की चाटुकारिता बंद करे। सरकारों को भी यह समझना होगा कि मुफ्त के चुनावी झुनझुनों से राज्य का विकास नहीं हो सकता, युवाओं को नियमित रोजगार देना और पारदर्शी चयन प्रक्रियाओं को बहाल करना ही राज्य के हित में रहेगा।*

