
विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन 68500 शिक्षक भर्ती में कथित आरक्षण घोटाले का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया गया। विपक्षी दल के जनप्रतिनिधियों ने सदन के भीतर इस मामले को प्रमुखता से उठाते हुए वंचित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने और शीघ्र नियुक्ति देने की मांग की।

बताया गया कि 68500 शिक्षक भर्ती का विज्ञापन 9 जनवरी 2018 को जारी हुआ था। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी वर्ग को आरक्षित श्रेणी से अलग कर सामान्य वर्ग के साथ रखा गया, जिसके कारण उन्हें लिखित परीक्षा में आरक्षित वर्गों को मिलने वाली 5 प्रतिशत अंकों की छूट का लाभ नहीं मिल सका। इससे बड़ी संख्या में ओबीसी एवं अन्य वंचित वर्गों के अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए।

अभ्यर्थियों के अनुसार, इस संबंध में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग तथा विधान परिषद की संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति ने भी उनके पक्ष में आदेश एवं संस्तुतियां दी थीं। इसके बावजूद सात वर्षों से उन्हें न्याय और नियुक्ति का इंतजार करना पड़ रहा है।

विधानसभा में विपक्ष द्वारा इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाए जाने के बाद अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द निर्णय लेगी। ओबीसी अभ्यर्थी आशुतोष वर्मा, अखिल कुमार यादव एवं नवीन चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, उत्तर प्रदेश के 7 जुलाई 2026 के आदेश का अनुपालन करते हुए वंचित वर्गों के पात्र अभ्यर्थियों को तत्काल नियुक्ति प्रदान करे। उन्होंने कहा कि लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को अब और इंतजार न कराया जाए।

