भीषण गर्मी में कट रहे हरे-भरे बाग, परमिट के खेल में पर्यावरण पर मंडरा रहा बड़ा संकट
Sitapur/Reporterबिन्दू मौर्या
सीतापुर एक तरफ जनपद भीषण गर्मी और प्रचंड हीट वेव की मार झेल रहा है। हालात ऐसे हैं कि पंखे, कूलर और एसी तक बेअसर साबित हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिले में हरे-भरे आम के बागों पर इलेक्ट्रॉनिक आरा चलाकर हरियाली का खुलेआम कत्ल किया जा रहा है। आरोप है कि विभागीय संरक्षण और “परमिट के खेल” के चलते लकड़ी माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि फलदार पेड़ों को भी नहीं छोड़ा जा रहा।

सूत्रों के अनुसार इस पूरे खेल में पुलिस और वन विभाग की कथित सांठगांठ से लकड़ी माफियाओं का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है। जनपद में बड़े पैमाने पर आम के बागों की कटान जारी है, जबकि पेड़ों पर अभी फल लगे हुए हैं। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बचाने के तमाम दावों के बावजूद जिम्मेदार विभाग कथित रूप से परमिट जारी कर अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ रहा है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर फलदार और हरे-भरे पेड़ों की कटान की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है?
जनपद के कई क्षेत्रों को ग्रीन बेल्ट घोषित किए जाने के बावजूद वहां भी बागों को काटकर अवैध प्लाटिंग का खेल खुलेआम जारी है। भू-माफिया और लकड़ी माफिया मिलकर पर्यावरण को तबाह करने में जुटे हैं। हालांकि जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर निर्देश पर पहले भी ऐसे मामलों में सख्त कार्यवाही की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद माफियाओं के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। ताजा मामला कोतवाली देहात क्षेत्र के अढवल गांव का सामने आया है, जहां ग्रामीणों के अनुसार रिंकू और जब्बार नामक ठेकेदार द्वारा बड़े पैमाने पर फलदार आम के पेड़ों पर इलेक्ट्रॉनिक आरा चलाकर कटान की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि जब इसकी शिकायत संबंधित विभाग से की गई तो जवाब मिला कि कटान का “परमिट जारी” है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब पेड़ों पर फल लगे हुए हैं तो ऐसे समय में कटान की अनुमति देना न सिर्फ पर्यावरण के खिलाफ है, बल्कि किसानों की मेहनत और आमजन के हितों पर भी सीधा हमला है। लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्यवाही की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह हरियाली का सफाया होता रहा तो आने वाले समय में जनपद का तापमान और बढ़ेगा तथा पर्यावरणीय संकट भयावह रूप ले सकता है। वहीं जब इस संबंध में वन दरोगा लक्ष्मी यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कटान का परमिट जारी किया गया है। हालांकि ग्रामीणों ने मौके पर जांच की मांग की, लेकिन आरोप है कि वन विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचा, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।

