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चार माह बाद खुले चूड़धार मंदिर के कपाट, बर्फ से ढके रास्तों के चलते श्रद्धालुओं की यात्रा पर रोक, प्रशासन की अपील—मौसम सामान्य होने तक इंतजार करें

RamParkash Vats
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चूडाधार(सिरमौर)14 अ अप्रैल 2026/जिला ब्यूरो चीफ

वीडियो जानकारी देते हुए ब्यूरो चीफ

हिमालय की गोद में बसे चूड़धार मंदिर के कपाट जैसे ही चार माह बाद खुले, प्रकृति ने मानो अपनी दिव्यता का अद्भुत प्रदर्शन कर दिया। चार फुट मोटी बर्फ की चादर से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं के बीच ऊंची चोटी पर विराजमान यह पावन धाम ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो स्वर्ग स्वयं धरती पर उतर आया हो। श्वेत हिम पर पड़ती सूर्य की किरणें उस सौंदर्य को पूर्णिमा की रात की चांदनी सा उज्ज्वल बना रही थीं—एक ऐसा दृश्य, जिसे शब्दों में बांध पाना कठिन है।
सिरमौर, जिसका अर्थ ही “सबसे ऊंचा” और “श्रीरोमणी” है, उस अर्थ को उस क्षण सजीव करता नजर आया। देवधुन और पारंपरिक देव वाद्य यंत्रों की गूंज के साथ जब दरबार खोला गया, तो वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर हो उठा। हर ओर एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार था—मानो स्वयं देव शक्तियां इस पावन क्षण की साक्षी हों।
14 अप्रैल संक्रांति के शुभ अवसर पर खुले इन कपाटों के साथ ही पूजा-अर्चना का क्रम पुनः आरंभ हो गया है। हालांकि अभी आम श्रद्धालुओं के लिए यात्रा पर विराम है। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने लगभग 15 दिनों तक आवाजाही सीमित रखने के संकेत दिए हैं और फिलहाल केवल पुजारी व अधिकृत लोग ही पूजा कर रहे हैं।
करीब 11,985 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र अभी भी बर्फ की मोटी परत से ढका हुआ है। हालिया बर्फबारी ने रास्तों को और कठिन बना दिया है, जिससे यात्रा जोखिम भरी बनी हुई है। यही कारण है कि प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे फिलहाल धैर्य रखें और मौसम सामान्य होने के बाद ही यात्रा का रुख करें।
गौरतलब है कि हर वर्ष सर्दियों में भारी बर्फबारी के चलते चूड़धार धाम को बंद करना पड़ता है। इस वर्ष भी 30 नवंबर को कपाट बंद किए गए थे। अब मंदिर में नियमित पूजा शुरू हो चुकी है और मई माह से लंगर सेवा भी आरंभ होने की तैयारी है।
प्रकृति, आस्था और दिव्यता का यह संगम चूड़धार में आज जिस रूप में दिखाई दिया—वह केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाला अनुभव है।

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