महमूदाबाद सीतापुर07 April 2026/ राज्य ब्यूरो चीफ अनुज कुमार जैन

महमूदाबाद, सीतापुर। तहसील क्षेत्र के ग्राम सरैया में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए सामाजिक संगठनों और शिक्षकों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस अग्निकांड में कई परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा, वहीं कुछ लोग घायल भी हुए। अनेक घर जलकर राख हो गए, जिससे लोगों की दैनिक उपयोग की वस्तुओं के साथ-साथ बच्चों की किताबें, कॉपियां और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी नष्ट हो गई। इस कठिन परिस्थिति में बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए सामाजिक स्तर पर सहयोग का सिलसिला शुरू हुआ।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक छोटी बच्ची की तस्वीर तेजी से वायरल हुई, जिसमें वह राख के ढेर के बीच बैठकर पढ़ाई करती दिखाई दे रही थी। इस तस्वीर ने लोगों को भावुक कर दिया और बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ाई। इसी भावनात्मक पहलू को ध्यान में रखते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ के अंतर्गत राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ महमूदाबाद ने अग्निकांड पीड़ित बच्चों की मदद का निर्णय लिया। महासंघ के ब्लॉक अध्यक्ष संदीप वर्मा के निर्देश पर एक प्रतिनिधिमंडल ग्राम सरैया पहुंचा और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष अमित दीक्षित और मंत्री विवेक विमल शामिल रहे। उन्होंने पीड़ित बच्चों और उनके अभिभावकों से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया और भरोसा दिलाया कि समाज उनके साथ खड़ा है। इस दौरान उन्होंने बच्चों को शिक्षा से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया और कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई जारी रखना ही उनके उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें और उनकी पढ़ाई बाधित न होने दें।

महासंघ के पदाधिकारियों किस्मत द्विवेदी, सपना शर्मा, पीयूष वर्मा, विजय सोनकर, मोनिका गुप्ता, अनंत श्रीवास्तव और रंजना मिश्रा के सहयोग से अग्निकांड से प्रभावित बच्चों को शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। इस सामग्री में कॉपियां, किताबें, पेन, पेंसिल, स्कूल बैग सहित अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल थीं। बच्चों को नई शैक्षणिक सामग्री मिलने से उनके चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अग्निकांड में नष्ट हुई पढ़ाई से जुड़ी सामग्री की पूर्ति करना और बच्चों की शिक्षा को निरंतर बनाए रखना था।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह प्रयास भले ही छोटा है, लेकिन इससे बच्चों को पढ़ाई जारी रखने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा का दीपक बुझने नहीं देना चाहिए। बच्चों की लगन और जज्बे को देखते हुए समाज का दायित्व बनता है कि उनकी हर संभव सहायता की जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी जरूरत पड़ने पर इस प्रकार

