सौजन्य :- इंडिया टुडे ग्रुप (संपादन राम प्रकाश वत्स)
स्थान: क्रेमलिन, मॉस्को — एकातेरिना (कैथरीन) हॉल
साक्षात्कार: अंजना ओम कश्यप व गीता मोहन (इंडिया टुडे ग्रुप)
अवसर: भारत दौरे से कुछ घंटे पहले
अवधि: दो दशक बाद किसी भारतीय टीवी नेटवर्क को दिया गया विशेष इंटरव्यू
प्रश्न 1. राष्ट्रपति पुतिन, भारत दौरे से ठीक पहले आप भारतीय मीडिया से बात कर रहे हैं। इस दौरे को आप किस नज़र से देखते हैं?
पुतिन:
भारत मेरे लिए हमेशा एक विश्वसनीय, स्थिर और भरोसेमंद मित्र देश रहा है। यह दौरा भी उसी निरंतरता का हिस्सा है। हमारे बीच रणनीतिक साझेदारी दशकों से मज़बूत रही है, और मुझे विश्वास है कि नई दिल्ली के साथ मेरी बातचीत भविष्य के सहयोग को नए आयाम देगी। हम रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, व्यापार, अंतरिक्ष और तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में नए कदम उठा रहे हैं। भारत के साथ की यह साझेदारी संतुलित है और किसी दबाव में नहीं है—यह पारस्परिक सम्मान पर आधारित है।
प्रश्न 2. भारत-रूस दोस्ती को आप किस आधार पर सबसे मज़बूत मानते हैं?
पुतिन:
भारत और रूस की दोस्ती किसी राजनीतिक परिस्थिति पर निर्भर नहीं है। यह समय की कसौटी पर खरी उतरने वाली साझेदारी है। शीत युद्ध से लेकर आधुनिक वैश्विक व्यवस्था तक—दोनों देशों ने एक-दूसरे को कभी निराश नहीं किया।
हमारे रिश्ते पाँच स्तंभों पर खड़े हैं:
- सामरिक विश्वास
- ऊर्जा एवं रक्षा सहयोग
- मानवीय और सांस्कृतिक जुड़ाव
- निष्पक्ष विदेश नीति की समान सोच
- बहुध्रुवीय विश्व का साझा दृष्टिकोण
भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलता है, और रूस इसका sincerely सम्मान करता है। यही दोस्ती की असली शक्ति है।
प्रश्न 3. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आपकी व्यक्तिगत बॉन्डिंग कैसी है?
पुतिन:
प्रधानमंत्री मोदी केवल भारत के नेता ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं। उनके साथ काम करना हमेशा रचनात्मक और सहज रहा है।हम दोनों एक-दूसरे को समझते हैं और कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर समान दृष्टिकोण रखते हैं। वे व्यवहारिक नेतृत्व के प्रतीक हैं—और भारत को वैश्विक स्तर पर जिस तरह आगे बढ़ा रहे हैं, वह प्रशंसनीय है।कई बार निजी मुलाक़ातों में हमने भविष्य की तकनीक, युवा शक्ति और आर्थिक मॉडल पर लंबी बातचीत की है। यह रिश्ता औपचारिक से ज्यादा व्यक्तिगत है।
प्रश्न 4. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और भारत के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कई बार धमकी भरे बयान दिए। आप इन पर क्या कहते हैं?
पुतिन:
रूस किसी की धमकियों पर अपनी विदेश नीति नहीं बदलता। हमारी प्राथमिकता अपने साझेदार देशों के साथ सम्मानजनक रिश्ते बनाए रखना है—चाहे वह भारत हो या कोई और देश।अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बयानबाज़ी होती रहती है। लेकिन भारत और रूस के संबंध किसी तीसरे देश की अनुमति से नहीं चलेंगे।मुझे विश्वास है कि भारत भी अपनी स्वतंत्र रणनीति के लिए जाना जाता है। इसलिए जो लोग धमकियों या दबाव की भाषा बोलते हैं, वे वास्तविक भू-राजनीतिक संतुलन को नहीं समझते।
प्रश्न 5. यूक्रेन युद्ध पर पश्चिम आप पर सीधे आरोप लगाता है। भारत शांति का पक्षधर देश है—क्या भारत की मध्यस्थता को आप स्वीकार करेंगे?
पुतिन:
भारत शांति, स्थिरता और संवाद की संस्कृति में विश्वास रखता है—और मैं इसका सम्मान करता हूँ। प्रधानमंत्री मोदी ने कई मौकों पर मुझे संघर्ष को समाप्त करने और बातचीत की राह चुनने को कहा है।भारत की बात इसलिए महत्वपूर्ण होती है क्योंकि वह निष्पक्ष है और किसी दंभ के बिना सलाह देता है।जहाँ तक समाधान की बात है—रूस बातचीत के लिए तैयार है, पर शर्त यह है कि दूसरे पक्ष को भी वास्तविकता स्वीकार करनी होगी। एकतरफा शांतिवार्ता सम्भव नहीं
प्रश्न 6. क्या रूस भारत को ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में अधिक विकल्प देने वाला है, खासकर पश्चिमी प्रतिबंधों को देखते हुए?
पुतिन:
रूस भारत को वह सब उपलब्ध कराने के लिए तैयार है जो उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है।
- सस्ती ऊर्जा आपूर्ति
- दीर्घकालिक तेल और गैस अनुबंध
- न्यूक्लियर सहयोग
- रक्षा उपकरणों का निर्माण भारत में
- स्पेस और साइबर टेक्नोलॉजी साझेदारी
हम “मेक इन इंडिया” के बड़े समर्थक हैं और भविष्य में कई रक्षा प्रणालियाँ भारत में ही संयुक्त रूप से बनेंगी\
प्रश्न 7. वैश्विक राजनीति में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर कई विश्लेषक भारत-रूस संबंधों की दिशा बदलते देखते हैं। आपका क्या विचार है?
पुतिन:
चीन और भारत दोनों रूस के करीबी साझेदार हैं। पर हमारे संबंध दोनों से अलग-अलग आधारों पर हैं।मैं स्पष्ट कर दूँ—रूस किसी बड़ी शक्ति का अनुयायी नहीं है। हम स्वतंत्र राष्ट्र हैं और हर देश के साथ स्वतंत्र रिश्ते रखते हैं।भारत-रूस संबंध अपनी जगह मज़बूत हैं और किसी तीसरे देश से प्रभावित नहीं होते।हम चाहते हैं कि भारत और चीन भी स्थिरता के रास्ते पर आगे बढ़ें—क्योंकि एशिया का भविष्य शांति, विकास और सहयोग में है।
प्रश्न 8. भारत के साथ व्यापार में अमेरिकी डॉलर को हटाकर अपनी-अपनी मुद्राओं में लेन-देन की चर्चाएँ चल रही हैं। क्या रूस इसे निर्णायक कदम मानता है?
पुतिन:
हाँ, बिल्कुल। दुनिया बहुध्रुवीय हो रही है और व्यापारिक लेन-देन का ढांचा भी बदलना ही चाहिए।भारत और रूस के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार न केवल अधिक सरल है, बल्कि यह दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को भी मजबूत बनाता है।हम डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं—लेकिन यह राजनीतिक बयान नहीं है। यह व्यापारिक व्यवहार्यता और आर्थिक स्थिरता का निर्णय है।
प्रश्न 9. G20 में भारत की अध्यक्षता और वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका को आप कैसे देखते हैं?
पुतिन:
भारत ने G20 को नई दिशा दी। वह वैश्विक दक्षिण की आवाज़ बनकर उभरा है। भारत की प्राथमिकता हमेशा मानवता, वैश्विक साझेदारी और व्यावहारिक समाधानों पर रही है।दुनिया भारत की नेतृत्व क्षमता को पहचान रही है—और यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का परिणाम है।मुझे विश्वास है कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यवस्था को स्थिर और संतुलित बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
प्रश्न 10. अंत में—भारत के लोगों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
पुतिन:
भारत मेरी दृष्टि में सिर्फ एक रणनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक मित्र है। रूस की जनता भारत को सम्मान देती है।मैं भारत के युवाओं, उद्यमियों, वैज्ञानिकों और नेताओं को यह कहना चाहता हूँ कि रूस आपके साथ मिलकर भविष्य के विकास, विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और वैश्विक स्थिरता के लिए काम करता रहेगा।भारत-रूस दोस्ती केवल दो देशों की नहीं—यह दो सभ्यताओं का बंधन है।
कैथरीन हॉल में हुए इस ऐतिहासिक इंटरव्यू ने एक बार फिर साबित किया कि पुतिन भारत को कितना रणनीतिक महत्व देते हैं। भारत दौरे से पहले दिए गए इस विस्तृत संवाद ने रूस-भारत संबंधों को नई मजबूती दी है। यह इंटरव्यू न केवल राजनीतिक दृष्टि से, बल्कि कूटनीतिक और वैश्विक परिप्रेक्ष्य से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

