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पारदर्शिता और विकास की दिशा में बड़ा कदम — हिमाचल के पंचायत घरों में अब CCTV निगरानी और नई सुविधाएँपारदर्शिता की ओर नया सफर

RamParkash Vats
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ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह

शिमला/17/10/2025/ S.C.B. विजय सम्याल

पारदर्शिता की ओर नया सफर
हिमाचल प्रदेश की पंचायत व्यवस्था में अब एक नई पारदर्शी व्यवस्था की शुरुआत होने जा रही है। ग्रामीण स्तर पर शासन को मजबूत और जवाबदेह बनाने के लिए राज्य सरकार ने पंचायत घरों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना है, बल्कि सरकारी बैठकों, रिकॉर्ड और निर्णय प्रक्रिया पर वास्तविक समय में निगरानी रखना भी है। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने यह घोषणा कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान की, जहाँ उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया।
नया पंचायत घर – आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित
कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के मांजू डाबरी और कोहलू जुब्बड़ (तारापुर) में नवनिर्मित पंचायत घरों का लोकार्पण ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह द्वारा किया गया।यह नया पंचायत भवन 1 करोड़ 14 लाख रुपये की लागत से निर्मित हुआ है और दो मंजिला इस भवन में आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया गया है —जिसमें पुस्तकालय, बैठक हॉल, सम्मेलन हॉल, प्रधान और सचिव के कक्ष, तकनीकी सहायक और मनरेगा सहायक के लिए कार्यालय, रसोई घर और शौचालय शामिल हैं।मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि ये भवन ग्रामीणों की सामाजिक, प्रशासनिक और विकासात्मक गतिविधियों का केंद्र बनेंगे। इसके साथ ही गुम्मा-कंडा सड़क परियोजना का शिलान्यास भी किया गया, जिससे क्षेत्रीय संपर्कता और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी।
सीसीटीवी निगरानी — पारदर्शिता और जवाबदेही की नई परंपरा
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि अब प्रदेश के सभी पंचायत घरों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, ताकि वहां होने वाली बैठकों, रिकॉर्ड कार्यवाही और योजनाओं के क्रियान्वयन पर लगातार नजर रखी जा सके।उन्होंने कहा —“पंचायत घरों में बहुत महत्वपूर्ण दस्तावेज और अभिलेख होते हैं। सीसीटीवी के माध्यम से 24 घंटे निगरानी से न केवल सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितता पर भी अंकुश लगेगा।”इस कदम से पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के विश्वास में वृद्धि होगी। यह ग्रामीण प्रशासन में तकनीक के प्रभावी उपयोग का उदाहरण भी बनेगा।
जनसहभागिता और संसाधन सृजन की पहल
मंत्री ने यह भी घोषणा की कि पंचायत घरों और उनके परिसरों का उपयोग स्थानीय जनता अपने समारोहों, बैठकों और सामाजिक आयोजनों के लिए कर सकेगी। हालांकि, इसके लिए पंचायत शुल्क निर्धारित करेगी ताकि पंचायत को अतिरिक्त आय प्राप्त हो और उसका उपयोग जनहित कार्यों में किया जा सके।उन्होंने फर्नीचर खरीद के लिए 1.5 लाख रुपये, श्मशान घाट तक मार्ग के निर्माण के लिए 2 लाख रुपये, और स्थानीय मैदान निर्माण के लिए तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए।इसके साथ ही जल शक्ति विभाग को कुई क्षेत्र में टैंक निर्माण के लिए भूमि चयन होते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए।
लगातार जारी है विकास का सिलसिला
मंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में इस पंचायत के विकास के लिए 52 लाख रुपये से अधिक राशि विभिन्न मदों में खर्च की जा चुकी है। इसके अलावा, बल्देया-मानड़ सड़क के लिए ₹17.14 करोड़ की सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल चुकी है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश भर में लगभग 150 नए पंचायत घरों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिनमें से प्रत्येक पर औसतन 1 करोड़ 14 लाख रुपये की लागत आ रही है।इन भवनों में न केवल प्रशासनिक कार्य होंगे बल्कि इन्हें पटवार सर्कल और अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए भी उपयोग में लाया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को एक ही स्थान पर अधिकतम सेवाएं मिल सकेंगी।
ग्रामीण विकास का नया अध्याय
हिमाचल प्रदेश सरकार का यह कदम ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। पंचायत घर अब केवल प्रशासनिक इमारतें नहीं रहेंगी, बल्कि यह ग्रामीण सहभागिता, पारदर्शिता और विकास के जीवंत प्रतीक बनेंगी।सीसीटीवी निगरानी, आधुनिक सुविधाएं और जनसहयोग आधारित प्रबंधन न केवल ग्रामीण शासन की गुणवत्ता बढ़ाएगा, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को और भी मजबूत करेगा।यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इस पहल से हिमाचल की पंचायतें आने वाले समय में ‘स्मार्ट पंचायतों’ के रूप में देश के सामने एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करेंगी

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