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सरकार की लापरवाही से चौकीदारों पर दोहरी मार

RamParkash Vats
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शिमला 21/09/2025, राज्य चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल

यह मामला वास्तव में सरकार की लापरवाही और अफसरशाही की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। पंचायत चौकीदार, जो पहले से ही बेहद कम मानदेय पर काम कर रहे हैं, अब उन्हें रिकवरी के आदेशों के चलते और मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बिना फाइनेंस डिपार्टमेंट की अनुमति लिए मानदेय बढ़ाना और फिर उसी रकम की वसूली करना, यह कर्मचारियों की नियति से खिलवाड़ है।


सरकार की लापरवाही से चौकीदारों पर दोहरी मार

हिमाचल प्रदेश में लगभग 1500 पंचायत चौकीदार दैनिक वेतनभोगी के तौर पर कार्यरत हैं। उनका मानदेय पहले ही बेहद कम है, जिस पर वे अपने परिवार का गुजारा मुश्किल से चला रहे हैं। ऐसे में 2024 में बिना वित्त विभाग की अनुमति के 25 रुपए बढ़ोतरी करके उन्हें 400 रुपए रोजाना मानदेय देने का फैसला किया गया। चौकीदारों ने इसे एक राहत समझा, लेकिन अब जब उसी बढ़े हुए मानदेय की रिकवरी शुरू हो गई है, तो उनकी आर्थिक हालत और खराब हो रही है।


अफसरशाही की जल्दबाजी, कर्मचारियों का नुकसान

यह स्पष्ट है कि कैबिनेट के फैसले और बजट घोषणाओं के बावजूद वित्त विभाग की औपचारिक मंजूरी लेना जरूरी था। अफसरों ने इस प्रक्रिया की अनदेखी कर जल्दबाजी में मानदेय बढ़ा दिया। परिणामस्वरूप, अब चौकीदारों से रिकवरी की जा रही है। यह गलती सरकार या अफसरशाही की थी, लेकिन खामियाजा चौकीदारों को भुगतना पड़ रहा है।


विरोध और असंतोष

मंडी और हमीरपुर जिलों में जब रिकवरी के आदेश आए तो चौकीदारों में हड़कंप मच गया। हमीरपुर में जहां 17 महीने का बढ़ा हुआ मानदेय एकमुश्त काटा गया, वहीं मंडी में किस्तों में कटौती का आदेश हुआ है। कर्मचारी संगठनों ने इसे अन्याय करार देते हुए विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि यह अफसरशाही की गलती है, उसकी भरपाई कर्मचारी क्यों करें?


सरकार की योजनाओं पर सवाल

यह पूरा मामला दिखाता है कि सरकार कोई भी योजना या घोषणा शुरू करने से पहले पूरी कानूनी और वित्तीय प्रक्रिया पूरी नहीं करती। नतीजा यह होता है कि基层 स्तर पर काम करने वाले गरीब कर्मचारी पिस जाते हैं। चौकीदार न तो यूनियनबाज हैं और न ही उच्च पदस्थ कर्मचारी, इसलिए उन पर ही रिकवरी का डंडा चला दिया गया।


आगे की राह

जरूरी है कि सरकार इस मामले की तुरंत समीक्षा करे। यदि मानदेय बढ़ाने में वित्त विभाग की मंजूरी नहीं ली गई थी, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अफसरों की तय होनी चाहिए। चौकीदारों से रिकवरी करना अन्यायपूर्ण है। साथ ही, भविष्य में किसी भी योजना की घोषणा से पहले सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी विभागीय और वित्तीय प्रक्रियाएं पूरी हों, ताकि कर्मचारियों को बाद में ऐसी परेशानी न उठानी पड़े।


👉 यह घटना साफ करती है कि अफसरशाही की लापरवाही का बोझ हमेशा निचले तबके के कर्मचारियों पर ही डाला जाता है। पंचायत चौकीदारों के साथ हो रही यह ज्यादती सरकार के लिए एक चेतावनी है कि घोषणाओं को लागू करने से पहले नियमों का पालन अनिवार्य किया जाए।

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