शस्त्र पूजन के साथ राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश, प्लास्टिक व सिंगल यूज डिस्पोजल का बहिष्कार रहा विशेष आकर्षण
नूरपुर से विनय महाजन—हिमाचल प्रदेश के नूरपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से पथ संचलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने अनुशासन और एकजुटता का परिचय देते हुए संचलन में भाग लिया। पथ संचलन के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। कार्यक्रम में शस्त्र पूजन भी किया गया तथा राष्ट्रसेवा, चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।
पथ संचलन बजीर राम सिंह पठानिया स्मारक परिसर से आरंभ हुआ। इसके बाद स्वयंसेवक चौगान से होते हुए वापस बजीर राम सिंह पठानिया स्मारक परिसर पहुंचे। मार्ग में जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर संचलन में शामिल स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया। इस दौरान वातावरण में उत्साह और सामाजिक सहभागिता देखने को मिली।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य उमेश राणा ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक अशोक कुमार ने संघ की गतिविधियों और कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
अशोक कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संस्कारों की पाठशाला है। संघ की शाखाओं में भाग लेने से व्यक्ति के चरित्र निर्माण, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने में सहायता मिलती है। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से संघ की गतिविधियों से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव रखते हुए राष्ट्रहित में कार्य करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाने का संकल्प
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हरदेव ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की यात्रा में स्वयंसेवकों ने राष्ट्रहित से जुड़े विभिन्न कार्यों में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना से लेकर अब तक राष्ट्रसेवा और सामाजिक जागरूकता को प्रमुखता दी गई है। स्वयंसेवक आगे भी राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाने के उद्देश्य से निरंतर कार्य करते रहेंगे।उन्होंने स्वयंसेवकों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने, आपसी सहयोग बढ़ाने और राष्ट्रीय मूल्यों को मजबूत करने के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।
प्लास्टिक मुक्त आयोजन ने खींचा ध्यान
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण पर्यावरण संरक्षण के प्रति दिखाई गई प्रतिबद्धता रही। आयोजन में प्लास्टिक और एकल-उपयोग वाले डिस्पोजल बर्तनों का पूर्ण बहिष्कार किया गया। इसके स्थान पर पारंपरिक कटोरियों और गिलासों का इस्तेमाल किया गया।इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, भारतीय परंपराओं और जिम्मेदार सामाजिक व्यवहार का संदेश दिया गया। आयोजन में पारंपरिक बर्तनों का उपयोग यह दर्शाने का प्रयास था कि सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से भी आयोजित किया जा सकता है।नूरपुर में आयोजित इस पथ संचलन के माध्यम से स्वयंसेवकों ने अनुशासन, राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को प्रमुखता दी

