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मातृ-शिशु अस्पताल पर अजय महाजन ने खोली तथ्यों की परतें, बोले—जनता के साथ धोखा नहीं, हमेशा की जनसेवा

RamParkash Vats
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नूरपुर। सिविल अस्पताल नूरपुर के बहुचर्चित मातृ-शिशु अस्पताल को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी के बीच प्रदेश के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय महाजन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले में जनता को गुमराह करने के बजाय पूरे घटनाक्रम के तथ्यों को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा सिद्धांतों की राजनीति की है और जनता के हितों से कभी समझौता नहीं किया। अस्पताल को लेकर श्रेय लेने की होड़ में जुटे लोगों को पहले इसके इतिहास, निर्माण और इसे शुरू करने में आई बाधाओं की जानकारी लेनी चाहिए।

2017 में हुआ शिलान्यास, 2022 में उद्घाटन के बाद भी शुरू नहीं हो पाया अस्पताल

मातृ-शिशु अस्पताल नूरपुर का शिलान्यास सितंबर 2017 में हुआ था। इसके बाद अस्पताल भवन का निर्माण कार्य आगे बढ़ा और 8 अक्टूबर 2022 को इसका उद्घाटन किया गया। हालांकि, उद्घाटन के बावजूद अस्पताल लंबे समय तक पूरी तरह क्रियाशील नहीं हो सका। बिजली-पानी की व्यवस्था, शेष निर्माण कार्यों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी के कारण क्षेत्र की जनता को इस अस्पताल का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।

करीब 50 बिस्तरों की क्षमता वाले इस अस्पताल का उद्देश्य नूरपुर के साथ-साथ इंदौरा, जवाली, फतेहपुर और आसपास के क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं तथा नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। ऐसे महत्वपूर्ण संस्थान का लंबे समय तक शुरू न हो पाना स्वाभाविक रूप से जनता की चिंता का विषय रहा है।

अधूरे कार्यों के लिए धनराशि का मुद्दा भी महत्वपूर्ण

अस्पताल को शुरू करने के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता का मुद्दा भी समय-समय पर सामने आता रहा। दिसंबर 2024 में स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल के नूरपुर दौरे के दौरान अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए 1.5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई थी। इसके बाद दिसंबर 2025 में प्रदेश सरकार द्वारा अस्पताल के लिए 3.18 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की खबर प्रकाशित हुई।

ये तथ्य स्पष्ट करते हैं कि अस्पताल को पूरी तरह चालू करने के लिए केवल भवन का निर्माण और उद्घाटन पर्याप्त नहीं था, बल्कि शेष कार्यों, बिजली-पानी की व्यवस्था, आवश्यक उपकरणों और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन की तैयारियां भी जरूरी थीं।

सत्ता बदली, लेकिन जनसेवा का संकल्प नहीं बदला

अजय महाजन ने कहा कि नूरपुर की जनता ने चुनाव में जो जनादेश दिया, उसे उन्होंने स्वीकार किया। लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है, लेकिन चुनाव परिणाम किसी जनप्रतिनिधि की सामाजिक जिम्मेदारी समाप्त नहीं करते।

उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा जनहित को प्राथमिकता दी है। विपक्ष में रहते हुए भी क्षेत्र की समस्याओं को उठाना और जनता की आवाज बनना उनकी जिम्मेदारी है। मातृ-शिशु अस्पताल का विषय किसी एक राजनीतिक दल की प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा मामला है।

महाजन के अनुसार, राजनीति का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना और वोट हासिल करना नहीं होना चाहिए। असली उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना, क्षेत्र का विकास करना और जरूरतमंद लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।

श्रेय की राजनीति नहीं, जनता को मिलनी चाहिए सुविधा

पूर्व विधायक ने कहा कि मातृ-शिशु अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अस्पताल पूरी तरह शुरू हो और लोगों को इसका लाभ मिले।

उन्होंने कहा कि नूरपुर की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि अस्पताल की शुरुआत कब हुई, निर्माण के दौरान क्या परिस्थितियां रहीं, इसे शुरू करने में देरी क्यों हुई और इसे पूर्ण रूप से क्रियाशील बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए।

अजय महाजन का स्पष्ट संदेश है कि जनहित के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य जनता से केवल वोट लेना नहीं, बल्कि उनकी सेवा करना भी है। नूरपुर की जनता ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी, उसे उन्होंने हमेशा गंभीरता से लिया है और आगे भी क्षेत्र के हितों के लिए आवाज उठाते रहेंगे।

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