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फतेहपुर में अंतरपीढ़ीगत जुड़ाव कार्यक्रम आयोजित, बुजुर्गों के सम्मान और पीढ़ियों के बीच संवाद पर दिया जोर

RamParkash Vats
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बुजुर्गों का अनुभव समाज की पूंजी, युवाओं को इससे सीख लेनी चाहिए : भवानी पठानिया

फतेहपुर के डॉ. अंबेडकर भवन में आयोजित अंतरपीढ़ीगत जुड़ाव कार्यक्रम में विधायक भवानी सिंह पठानिया के साथ जनप्रतिनिधि, पूर्व सैनिक और विद्यार्थी।

फतेहपुर, 15 अक्टूबर। समाज की वास्तविक ताकत उसकी परंपराओं, संस्कारों और अनुभवों में निहित होती है। बुजुर्गों का जीवन अनुभव युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक का काम करता है। यदि युवा बुजुर्गों के अनुभवों से सीख लें और वरिष्ठ नागरिक नई पीढ़ी की सोच को समझें, तो समाज में आपसी सहयोग, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत बनाया जा सकता है। यह बात विधायक एवं राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया ने वीरवार को फतेहपुर स्थित डॉ. अंबेडकर भवन में आयोजित अंतरपीढ़ीगत जुड़ाव कार्यक्रम के दौरान कही। कार्यक्रम का आयोजन तहसील कल्याण अधिकारी फतेहपुर की ओर से वरिष्ठ नागरिकों और युवा पीढ़ी के बीच संवाद, आपसी समझ तथा सामाजिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया।

बुजुर्गों का सम्मान हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भवानी सिंह पठानिया ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों का अनुभव समाज की अमूल्य पूंजी है। उन्होंने अपने जीवन में अनेक परिस्थितियों, चुनौतियों और बदलावों का सामना किया होता है। उनके अनुभव युवाओं को जीवन की कठिनाइयों को समझने, सही निर्णय लेने और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का सम्मान करना केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और नैतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज के बदलते सामाजिक परिवेश में परिवारों और समाज के भीतर पीढ़ियों के बीच संवाद बनाए रखना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों को महत्व दें, उनके साथ समय बिताएं और उनके विचारों को सम्मानपूर्वक सुनें। उन्होंने यह भी कहा कि बुजुर्गों के अनुभव और युवाओं की नई सोच का समन्वय समाज को अधिक संवेदनशील, जागरूक और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विद्यार्थियों ने साझा किए विचार, संवाद से सामने आए सामाजिक सरोकार

कार्यक्रम के दौरान राजकीय महाविद्यालय देहरी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय फतेहपुर तथा हिमालय पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने अंतरपीढ़ीगत जुड़ाव विषय पर अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों की सहभागिता का उद्देश्य युवाओं को वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों, भावनाओं और सामाजिक योगदान के प्रति संवेदनशील बनाना रहा।

ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर देते हैं कि समाज का विकास केवल आधुनिक शिक्षा, तकनीक और रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए मानवीय संबंधों, नैतिक मूल्यों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को समझना भी जरूरी है। बुजुर्गों और युवाओं के बीच संवाद बढ़ने से अनुभवों का आदान-प्रदान होता है

और दोनों पीढ़ियां एक-दूसरे के दृष्टिकोण को बेहतर ढंग से समझ सकती हैं। कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि वरिष्ठ नागरिकों की सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने और उन्हें परिवार तथा समुदाय के साथ सक्रिय रूप से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।

पूर्व सैनिकों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता ने बढ़ाया कार्यक्रम का महत्व

अंतरपीढ़ीगत जुड़ाव कार्यक्रम में पूर्व सैनिक अध्यक्ष जीत शर्मा, जिला परिषद सदस्य विवेक पधेड़िया और रघुबीर सिंह पठानिया सहित विभिन्न पंचायतों के प्रधान उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों ने भी भाग लिया। इसके अतिरिक्त लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) तथा खंड विकास अधिकारी कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।

विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सामाजिक जुड़ाव के विषय को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया। पूर्व सैनिकों के अनुभव, पंचायत प्रतिनिधियों की स्थानीय स्तर पर भूमिका और विद्यार्थियों की भागीदारी इस तरह के आयोजनों को समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद स्थापित करने का अवसर देती है। कार्यक्रम का संदेश यह रहा कि वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों का लाभ केवल उनके परिवारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज को भी उनकी सीख और योगदान से लाभ उठाना चाहिए।

वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं को साझा मंच देना कार्यक्रम का उद्देश्य

तहसील कल्याण अधिकारी अनुप सिंह ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों और युवाओं की सोच को साझा मंच प्रदान करना है। इसके माध्यम से समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सामाजिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों के बीच बेहतर संवाद स्थापित होने से आपसी समझ विकसित होती है और सामाजिक संबंधों को मजबूती मिलती है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को वरिष्ठ नागरिकों के जीवन संघर्षों, अनुभवों और योगदान को करीब से जानने का अवसर मिलता है। साथ ही वरिष्ठ नागरिक भी युवा पीढ़ी के विचारों, आकांक्षाओं और बदलते सामाजिक परिवेश को समझ सकते हैं।

अनुभव और नई सोच के मेल से मजबूत होगा समाज

फतेहपुर में आयोजित यह कार्यक्रम समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि पीढ़ियों के बीच दूरी कम करने के लिए संवाद, सम्मान और सहभागिता आवश्यक हैं। बुजुर्गों के अनुभव युवाओं का मार्गदर्शन कर सकते हैं, जबकि युवाओं की ऊर्जा और नई सोच सामाजिक बदलाव को गति दे सकती है।

जरूरत इस बात की है कि ऐसे कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित न रहें, बल्कि परिवारों, शिक्षण संस्थानों और पंचायत स्तर पर भी वरिष्ठ नागरिकों के साथ संवाद को प्रोत्साहित किया जाए। बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सहभागिता और भावनात्मक सहयोग देना पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जब अनुभव और नई सोच एक साथ आगे बढ़ेंगे, तभी ऐसा समाज बनेगा जिसमें बुजुर्गों को सम्मान, युवाओं को मार्गदर्शन और आने वाली पीढ़ियों को बेहतर संस्कार मिल सकेंगे।

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