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उपभोक्ता आयोग की एकपक्षीय कार्रवाई, शिकायतकर्ता को ₹6,000 देने का आदेश; कुल आर्थिक देनदारी ₹1.06 लाख
UTTER PRADESH: REPORTER ANUJ KUMAR JAIN: नियमों के अनुसार, होटल और रेस्टोरेंट संचालक ग्राहकों से लागू निर्धारित मूल्य या घोषित दरों से अधिक वसूली नहीं कर सकते। लेकिन हकीकत में कई बार इसके विपरीत मामले सामने आते हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के हाथरस स्थित प्रसिद्ध बीबीसीएन रेस्टोरेंट में सामने आया, जहां पानी की बोतल पर दो रुपये अतिरिक्त वसूलने का मामला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग तक पहुंच गया। इस मामले में आयोग की कार्रवाई ने उपभोक्ताओं के अधिकारों और कारोबारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। अब जरूरत है कि ऐसे मामलों में नियमों का पालन सुनिश्चित हो और ग्राहकों के हितों की रक्षा की जाए।
उत्तर प्रदेश के हाथरस स्थित मशहूर बीबीसीएन रॉयल रेस्टोरेंट एंड पार्टी हॉल को पानी की बोतल पर निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से महज दो रुपये अधिक वसूलना भारी पड़ गया। अलीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए रेस्टोरेंट को जिला उपभोक्ता वेलफेयर फंड में एक लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए एक हजार रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह कुल आर्थिक देनदारी 1.06 लाख रुपये बनती है।
₹18 की बोतल के वसूले ₹20
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मामला 11 मार्च 2026 का है। अलीगढ़ निवासी अधिवक्ता अंकुर अग्रवाल हाथरस के उक्त रेस्टोरेंट में भोजन करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पीने के लिए पानी की बोतल मंगवाई। बोतल पर 18 रुपये एमआरपी अंकित थी, लेकिन रेस्टोरेंट ने उनसे 20 रुपये वसूल किए। शिकायतकर्ता ने निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूले जाने पर आपत्ति जताई और इस मामले को उपभोक्ता आयोग तक पहुंचाया।
बिल और बोतल की तस्वीर बनी अहम साक्ष्य
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत के समर्थन में रेस्टोरेंट का बिल और पानी की बोतल की तस्वीर आयोग के समक्ष प्रस्तुत की। इन साक्ष्यों में बोतल पर अंकित एमआरपी और बिल में दर्ज कीमत के बीच अंतर सामने आया। शिकायत में अतिरिक्त राशि वसूले जाने को अनुचित व्यापार व्यवहार बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।
रेस्टोरेंट के पेश नहीं होने पर एकपक्षीय सुनवाई
रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग की ओर से पर्याप्त अवसर दिए जाने और नोटिस तामील होने के बावजूद रेस्टोरेंट की ओर से कोई प्रतिनिधि अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद आयोग ने एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई की और अपना आदेश सुनाया।
आयोग ने एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने को अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए रेस्टोरेंट पर एक लाख रुपये की राशि जिला उपभोक्ता वेलफेयर फंड में जमा करने का निर्देश दिया। साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए एक हजार रुपये और वाद खर्च के रूप में पांच हजार रुपये देने का आदेश दिया। रिपोर्टों के अनुसार, निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं करने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश?
यह मामला उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूकता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। छोटी-सी अतिरिक्त वसूली के मामले में भी ग्राहक बिल और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखकर उचित कानूनी मंच पर शिकायत कर सकता है।
संदेश साफ है—ग्राहक से निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूलने के मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे खरीदारी या भोजन के दौरान मिले बिल को सुरक्षित रखें और अनुचित वसूली होने पर संबंधित उपभोक्ता आयोग या सक्षम प्राधिकरण से संपर्क करें

