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SIR के विरोध में दिल्ली पहुंचे CM सुक्खू और हिमाचल के मंत्री

RamParkash Vats
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राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन का ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

SHIMLA ,नई दिल्ली, 12 अक्टूबर।:विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) और कथित मतदाता अनियमितताओं को लेकर सोमवार को दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेताओं ने ‘चलो दिल्ली-मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ के तहत सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। इस प्रदर्शन में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश के मंत्रियों के भी शामिल होने की बात सामने आई है।विपक्षी दलों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के कारण पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

ट्रक और बसों में निकला विपक्षी नेताओं का काफिला

राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं का काफिला बाराखंबा रोड से होते हुए मंडी हाउस पहुंचा। राहुल गांधी ट्रक पर सवार थे, जबकि उनके पीछे चल रही बस में विपक्षी दलों के कई सांसद और नेता मौजूद थे। मंडी हाउस पर करीब डेढ़ घंटे तक काफिला रुका रहा। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और यातायात संबंधी कारणों से काफिले को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी।इसके बाद शाम करीब छह बजे राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के अन्य प्रमुख नेता पैदल सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़े। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई शुरू की, ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ यातायात भी सामान्य किया जा सके।

चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी लड़ाई

प्रदर्शन के बीच विपक्ष की कानूनी टीम की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची की पारदर्शिता, पुनरीक्षण प्रक्रिया और चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठाए।उधर, भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कथित चुनावी अनियमितताओं पर अपना पक्ष रखने के लिए INDIA गठबंधन के नेताओं की बैठक संबंधी मांग स्वीकार नहीं की। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने नेताओं को याचिका के माध्यम से अदालत का रुख करने की सलाह दी, क्योंकि संबंधित मामला पहले से विचाराधीन है।

छात्र संगठनों के प्रदर्शन से भी बढ़ा तनाव

इससे पहले रविवार को जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी। इनमें स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) सहित विभिन्न छात्र संगठनों के सदस्य शामिल बताए गए।

हिमाचल की भागीदारी पर भी नजर

दिल्ली में हुए इस प्रदर्शन में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और हिमाचल प्रदेश के मंत्रियों की भागीदारी राज्य की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विपक्षी गठबंधन ने जहां मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता का मुद्दा उठाया, वहीं इस पूरे घटनाक्रम में चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और अदालत की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।SIR को लेकर जारी यह विवाद अब राजनीतिक विरोध से आगे बढ़कर मतदाता अधिकारों, चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका से जुड़े सवालों के केंद्र में आ गया है।

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