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बिलासपुर पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, सड़क और रेलवे परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा

RamParkash Vats
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55,103 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट्स और 13,697 करोड़ की ग्रामीण सड़क योजनाओं पर चर्चा; रेलवे परियोजनाओं में राज्य सरकार की लंबित देनदारी का मुद्दा भी उठाया

बिलासपुर,Office Repoter Vinay mahajn: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा Friday को अपने गृह जिला बिलासपुर के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने उपायुक्त कार्यालय परिसर स्थित बचत भवन में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY), रेलवे परियोजनाओं तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अंतर्गत चल रहे विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने संबंधित अधिकारियों से परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्यों में आ रही बाधाओं और निर्धारित समयसीमा के बारे में जानकारी ली।बैठक में मंडी की लोकसभा सांसद कंगना रनौत, कांगड़ा के लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज, राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन, बिलासपुर सदर के विधायक त्रिलोक जम्वाल, नैनादेवी के विधायक रणधीर शर्मा, झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र गर्ग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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55,103 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट्स और 13,697 करोड़ की ग्रामीण सड़क योजनाओं पर चर्चा; रेलवे परियोजनाओं में राज्य सरकार की लंबित देनदारी का मुद्दा भी उठायाराष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर 55,103 करोड़ रुपये का निवेशप्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 4,170 सड़केंकीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना मार्च 2027 तक पूरी करने का लक्ष्यशिमला-मटौर कॉरिडोर पर 10,226 करोड़ रुपये की लागतभानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेलवे लाइन पर राज्य की देनदारी का मुद्दाचंडीगढ़-बद्दी रेलवे लाइन दिसंबर 2027 तक पूरी करने का लक्ष्यकेंद्र से मिले आर्थिक सहयोग का भी किया उल्लेखराज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवालविकास परियोजनाओं की समयसीमा पर टिकी निगाहें

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर 55,103 करोड़ रुपये का निवेश

बैठक के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने हिमाचल प्रदेश में चल रही सड़क एवं परिवहन परियोजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के तहत 25 राष्ट्रीय राजमार्गों के लगभग 2,592 किलोमीटर नेटवर्क पर 55,103 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में सड़क संपर्क का विशेष महत्व है। बेहतर सड़क नेटवर्क से पर्यटन, व्यापार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को गति मिल सकती है। साथ ही, दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाने में भी सड़क परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 4,170 सड़कें

जेपी नड्डा के अनुसार, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में लगभग 26,506 किलोमीटर लंबाई की 4,170 सड़कों से संबंधित कार्यों पर 13,697 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि योजना के प्रथम चरण की नौ सड़कें अभी लंबित हैं। संबंधित अधिकारियों को इन कार्यों को मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।ग्रामीण सड़कों का निर्माण प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ने, किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने और विद्यार्थियों तथा मरीजों के आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, निर्धारित समयसीमा के भीतर इन परियोजनाओं को पूरा करना संबंधित विभागों के लिए अहम चुनौती होगी।

कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना मार्च 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री ने कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि इस परियोजना की लागत लगभग 12,939 करोड़ रुपये है। इसमें 31 सुरंगें शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 44 किलोमीटर बताई गई है।उन्होंने कहा कि परियोजना को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।यह मार्ग हिमाचल प्रदेश के पर्यटन और परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। फोरलेन के निर्माण से चंडीगढ़ और अन्य मैदानी क्षेत्रों से मनाली की ओर जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ यात्रा समय में कमी आने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय व्यापार को भी लाभ मिल सकता है।

शिमला-मटौर कॉरिडोर पर 10,226 करोड़ रुपये की लागत

जेपी नड्डा ने शिमला-मटौर कॉरिडोर की जानकारी देते हुए बताया कि इस परियोजना पर लगभग 10,226 करोड़ रुपये की लागत प्रस्तावित है। इसमें 15 सुरंगें शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 13.6 किलोमीटर है।परियोजना को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।इस कॉरिडोर को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के बीच संपर्क बेहतर बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके निर्माण से सड़क यातायात को व्यवस्थित करने, आवागमन की सुविधा बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेलवे लाइन पर राज्य की देनदारी का मुद्दा

बैठक में रेलवे परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेलवे लाइन का विषय प्रमुखता से उठा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लगभग 62 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत 13,410 करोड़ रुपये है।जेपी नड्डा के अनुसार, इस परियोजना के लिए केंद्र के प्रति राज्य सरकार की देनदारी 4,818 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि राज्य सरकार की ओर से अब तक 847 करोड़ रुपये जमा करवाए गए हैं।उन्होंने यह भी कहा कि बिलासपुर से बैरी तक भूमि अधिग्रहण का मामला पिछले तीन वर्षों से राज्य सरकार के पास लंबित है। उनके अनुसार, भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण रेलवे लाइन के अगले चरण का निर्माण प्रभावित हो रहा है।केंद्रीय मंत्री ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए भूमि अधिग्रहण और वित्तीय दायित्वों से जुड़े मामलों का समयबद्ध समाधान आवश्यक है।यह रेलवे लाइन बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए परिवहन संपर्क मजबूत करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परियोजना के आगे बढ़ने से क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों, यात्री परिवहन और आर्थिक विकास को संभावित लाभ मिल सकता है।

चंडीगढ़-बद्दी रेलवे लाइन दिसंबर 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री ने चंडीगढ़-बद्दी रेलवे लाइन की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि इस परियोजना पर लगभग 1,540 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें से करीब 1,160 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं।उन्होंने बताया कि परियोजना को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।जेपी नड्डा के अनुसार, इस परियोजना के संबंध में भी राज्य सरकार की ओर से केंद्र के प्रति लगभग 348 करोड़ रुपये की देनदारी है, जिसमें से 231 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए जा चुके हैं।चंडीगढ़-बद्दी रेलवे लाइन औद्योगिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। बद्दी क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक इकाइयों को बेहतर रेल संपर्क मिलने से माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को सुविधा मिलने की संभावना है।

केंद्र से मिले आर्थिक सहयोग का भी किया उल्लेख

प्रेसवार्ता के दौरान जेपी नड्डा ने हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आर्थिक सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार की ओर से राज्य को 2,381 करोड़ रुपये दिए गए।इसके अतिरिक्त, उन्होंने राष्ट्रीय आपदा से संबंधित रिकवरी एवं पुनर्निर्माण कार्यों के लिए 2,006 करोड़ रुपये तथा बाहरी सहायता से जुड़े पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट्स के तहत 2,150 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाने का उल्लेख किया।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश में सड़क, रेलवे और स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकास योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। उनके अनुसार, इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को निर्धारित प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना चाहिए।

राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

जेपी नड्डा ने प्रेसवार्ता के दौरान हिमाचल प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से विभिन्न विकास योजनाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराए जाने के बावजूद राज्य सरकार इन परियोजनाओं को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रही है।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और अन्य विकास योजनाओं को गति देने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकार के बीच समन्वय आवश्यक है। भूमि अधिग्रहण और वित्तीय हिस्सेदारी जैसे मामलों के लंबित रहने से परियोजनाओं की समयसीमा प्रभावित हो सकती है।केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर यह भी आरोप लगाया कि वे केंद्र की ओर से उपलब्ध कराए गए आर्थिक सहयोग का पर्याप्त उल्लेख नहीं करते।हालांकि, परियोजनाओं में देरी, वित्तीय दायित्वों और भूमि अधिग्रहण की स्थिति को लेकर राज्य सरकार का पक्ष तथा संबंधित विभागों के अद्यतन आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे, ताकि पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सके।

विकास परियोजनाओं की समयसीमा पर टिकी निगाहें

बिलासपुर में आयोजित इस समीक्षा बैठक में सड़क और रेलवे परियोजनाओं की प्रगति के साथ-साथ वित्तीय दायित्वों तथा भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की लंबित सड़कों को मार्च 2027 तक पूरा करने, कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना को निर्धारित समयसीमा में आगे बढ़ाने और चंडीगढ़-बद्दी रेलवे लाइन को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य सामने रखा गया।अब इन परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित विभाग निर्माण कार्यों को कितनी तेजी से आगे बढ़ाते हैं और लंबित प्रशासनिक एवं वित्तीय मामलों का समाधान किस प्रकार किया जाता है।हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क और रेलवे संपर्क केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि पर्यटन, उद्योग, रोजगार और दूरदराज क्षेत्रों के विकास से भी जुड़ा है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार के बीच प्रभावी समन्वय तथा परियोजनाओं की नियमित निगरानी आवश्यक होगी।

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