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हमीरपुर: सेना के लिए आधुनिक ड्रोन तैयार करने वाले सर्वेश शर्मा को राज्यपाल ने किया सम्मानित

RamParkash Vats
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पढें संपूर्ण समाचार : संपादक राम प्रकाश वत्स

हमीरपुर के सर्वेश शर्मा ने रचा तकनीकी नवाचार का इतिहास, 3.50 करोड़ की रक्षा परियोजना को मिली मंजूरी
साधारण परिवार से निकलकर स्वदेशी ड्रोन तकनीक विकसित करने की दिशा में बढ़े कदम, राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने किया सम्मानित

हमीरपुर:हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के एक साधारण परिवार से निकलकर तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे राजकीय बहुतकनीकी संस्थान हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा ने प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। भारतीय सेना की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी ड्रोन तकनीक विकसित करने की दिशा में काम कर रहे सर्वेश के प्रोजेक्ट के लिए रक्षा मंत्रालय से 3.50 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने की जानकारी सामने आई है। उनकी इस उपलब्धि पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने हमीरपुर स्थित सर्किट हाउस में उनसे मुलाकात कर प्रोजेक्ट की जानकारी ली और प्रतिभा की सराहना की।

सर्वेश शर्मा वर्तमान में राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर में कंप्यूटर इंजीनियरिंग/कंप्यूटर साइंस के पांचवें सेमेस्टर के छात्र हैं। उनका प्रोजेक्ट ‘रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ ड्रोन के विकास से जुड़ा है। परियोजना का उद्देश्य सीमा निगरानी सहित रक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी ड्रोन तकनीक विकसित करना है। प्रोजेक्ट में ड्रोन संचालन के दौरान GPS पर निर्भरता कम करने तथा इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी तकनीकी चुनौतियों से निपटने की दिशा में समाधान विकसित करने पर काम किया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता से मिली प्रोजेक्ट को दिशा

सर्वेश शर्मा के ड्रोन प्रोजेक्ट की शुरुआत एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता से हुई। उन्होंने IIT जोधपुर और कोनार्क कोर से जुड़ी ड्रोन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता में देशभर से करीब 50 टीमों ने अपने विचार और मॉडल प्रस्तुत किए थे। सर्वेश की टीम ने इस प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता के दौरान मिले अनुभव और तकनीकी चुनौतियों ने उन्हें अपने विचार को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद सर्वेश ने अपने प्रोजेक्ट को केवल एक मॉडल या प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने स्वयं इसका प्रोटोटाइप तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया। रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती प्रोटोटाइप तैयार करने में करीब 87 हजार रुपये खर्च हुए। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने लगातार प्रयोग और तकनीकी सुधार का प्रयास जारी रखा।इसके बाद सर्वेश ने रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने वाले Defence Innovation Organisation (DIO) और Innovations for Defence Excellence (iDEX) से जुड़े कार्यक्रम के तहत आवेदन किया। इसी प्रक्रिया के आगे बढ़ने के बाद उनके प्रोजेक्ट के लिए 3.50 करोड़ रुपये की ग्रांट स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई है।

IIT रुड़की में होगा प्रोजेक्ट का अगला चरण

प्रोजेक्ट के अगले चरण में इसे IIT रुड़की में इनक्यूबेशन और तकनीकी सुविधाओं के माध्यम से आगे विकसित किए जाने की जानकारी दी गई है। यहां उपलब्ध शोध, तकनीकी संसाधनों और विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए सर्वेश अपने ड्रोन प्रोजेक्ट को अगले स्तर तक ले जाने का प्रयास करेंगे। रिपोर्टों के अनुसार परियोजना को करीब 20 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।हालांकि, ड्रोन की अंतिम तकनीकी क्षमताएं, परीक्षण के परिणाम और भारतीय सेना में इसके संभावित इस्तेमाल का स्तर प्रोजेक्ट के विकास एवं परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल परियोजना का फोकस स्वदेशी तकनीक के माध्यम से रक्षा क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए तकनीकी समाधान विकसित करना है।

राज्यपाल ने की युवा प्रतिभा की सराहना

सर्किट हाउस हमीरपुर में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने सर्वेश शर्मा से उनके प्रोजेक्ट के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने युवा छात्र के प्रयास और उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के युवाओं में तकनीकी प्रतिभा और नवाचार की अपार क्षमता है। इस तरह के प्रयास देश में स्वदेशी तकनीक, अनुसंधान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।राज्यपाल ने युवाओं से अनुसंधान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया। इस अवसर पर हमीरपुर की उपायुक्त गंधर्वा राठौर, पुलिस अधीक्षक बलवीर सिंह सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

दिहाड़ी मजदूर के बेटे ने सीमित संसाधनों में हासिल की बड़ी उपलब्धि

सर्वेश शर्मा की कहानी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद तकनीकी क्षेत्र में यह मुकाम हासिल किया है। वह हमीरपुर के बाहनवीं/बहनवी गांव से संबंध रखते हैं। रिपोर्टों के अनुसार उनके पिता संजीव कुमार दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। सर्वेश ने प्रारंभिक शिक्षा सरकारी विद्यालय से हासिल की और इसके बाद तकनीकी शिक्षा के लिए राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर में प्रवेश लिया।परिवार की सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि के बावजूद तकनीक और ड्रोन के प्रति उनकी रुचि लगातार बढ़ती गई। इसी रुचि ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता तक पहुंचाया और वहां से उनका विचार रक्षा क्षेत्र की नवाचार परियोजना में बदल गया। करीब 87 हजार रुपये के शुरुआती प्रोटोटाइप से शुरू हुआ सफर अब करोड़ों रुपये की परियोजना तक पहुंच चुका है।

हिमाचल के तकनीकी विद्यार्थियों के लिए बना प्रेरणा का उदाहरण

सर्वेश शर्मा की उपलब्धि ने उनके परिवार और संस्थान के साथ-साथ हमीरपुर जिले को भी गौरवान्वित किया है। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि किसी विद्यार्थी में तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के प्रति रुचि हो तो वह बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक विकसित करने का उनका प्रयास ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में रक्षा अनुसंधान और स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। अब सर्वेश के प्रोजेक्ट का अगला चरण IIT रुड़की में आगे बढ़ाया जाना है। आने वाले समय में इसके परीक्षण और तकनीकी विकास से यह स्पष्ट होगा कि ‘रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ ड्रोन किस स्तर तक रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होता है।

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