20 सितंबर से 20 अक्टूबर तक चलेगा अभियान, तालाबों, बावड़ियों और कुओं की सफाई के साथ लोगों को संरक्षण के प्रति किया जाएगा जागरूक
“मेरा जलस्रोत, मेरी जिम्मेदारी” की थीम के साथ मत्स्य विभाग ने शुरू किया अभियान, स्थानीय संस्थाओं और मत्स्य सहकारी सभा ने किया श्रमदान

नूरपुर। प्रदेश में जलस्रोतों को स्वच्छ एवं संरक्षित रखने के उद्देश्य से मत्स्य विभाग हिमाचल प्रदेश ने विश्व सफाई दिवस के अवसर पर एक माह के विशेष सफाई अभियान का शुभारंभ किया है। “मेरा जलस्रोत, मेरी जिम्मेदारी” और “जलस्रोतों की सफाई करें तथा जलीय जीवन बचाएं” की थीम के साथ शुरू किया गया यह अभियान 20 सितंबर से 20 अक्टूबर तक चलेगा। अभियान की शुरुआत फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र की खटियाड़ पंचायत स्थित ऐतिहासिक तालाब से की गई। इस दौरान मत्स्य विभाग के कर्मचारियों के साथ स्थानीय संस्थाओं तथा मत्स्य सहकारी सभा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने श्रमदान कर तालाब की सफाई की। सफाई अभियान के दौरान तालाब में लंबे समय से जमा कचरे और गंदगी को हटाया गया। विभाग की ओर से लोगों को जलस्रोतों में कूड़ा-कचरा न डालने तथा इनके प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए जागरूक किया गया। ऐतिहासिक खटियाड़ तालाब कभी स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत हुआ करता था, लेकिन समय के साथ उचित देखरेख के अभाव और आसपास से पहुंचने वाले कचरे के कारण इसकी स्वच्छता प्रभावित हुई। ऐसे में विश्व सफाई दिवस के अवसर पर इस तालाब से अभियान की शुरुआत कर विभाग ने जलस्रोतों के संरक्षण और स्वच्छता का संदेश दिया। विभाग का कहना है कि जलस्रोतों को स्वच्छ रखना केवल पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इससे जलीय जीव-जंतुओं के संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
मत्स्य विभाग पौंग बांध डिविजन की अगुवाई में हुआ श्रमदान। खटियाड़ में आयोजित सफाई अभियान का नेतृत्व मत्स्य विभाग पौंग बांध डिविजन के सह निदेशक संदीप सिंह ने किया। उनकी अगुवाई में विभागीय कर्मचारियों ने तालाब में सफाई अभियान चलाया। इस दौरान श्री गुगा जगहर पीर जी सेवा एवं जनकल्याण समिति तथा मत्स्य सहकारी सभा खटियाड़ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाते हुए श्रमदान किया। अभियान के दौरान तालाब में जमा कचरे और गंदगी को हटाया गया तथा आसपास के क्षेत्र को साफ किया गया। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि जलस्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी भी आवश्यक है। जब स्थानीय समुदाय किसी जलस्रोत को अपना समझकर उसकी देखभाल करता है तो उसके संरक्षण के परिणाम अधिक स्थायी होते हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे तालाबों, बावड़ियों, कुओं और अन्य जलस्रोतों में कूड़ा-कचरा न डालें तथा आसपास के क्षेत्रों में भी स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि जलस्रोतों में बढ़ता प्रदूषण जलीय जीवन के लिए भी खतरा पैदा करता है। इसलिए पानी को स्वच्छ रखना और उसमें रहने वाले जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
एक माह तक विभिन्न जलस्रोतों की होगी सफाई। मत्स्य विभाग की ओर से शुरू किया गया यह अभियान केवल खटियाड़ के ऐतिहासिक तालाब तक सीमित नहीं रहेगा। 20 सितंबर से 20 अक्टूबर तक चलने वाले विशेष अभियान के दौरान क्षेत्र के विभिन्न तालाबों, बावड़ियों, कुओं तथा अन्य जलस्रोतों की साफ-सफाई की जाएगी। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को जलस्रोतों के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। विभाग की ओर से लोगों को यह संदेश दिया जाएगा कि जलस्रोतों में कूड़ा-कचरा फेंकना न केवल स्वच्छता को प्रभावित करता है, बल्कि पानी की गुणवत्ता और जलीय जीवों के जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। अभियान के दौरान स्थानीय समुदाय, सामाजिक संस्थाओं और मत्स्य सहकारी सभाओं को भी अधिक से अधिक भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य जलस्रोतों की नियमित साफ-सफाई की आवश्यकता के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना और उन्हें संरक्षण की जिम्मेदारी से जोड़ना है। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि यदि स्थानीय लोग अपने आसपास के जलस्रोतों की नियमित निगरानी और साफ-सफाई में सहयोग करें तो जलस्रोतों को लंबे समय तक स्वच्छ एवं सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके लिए सामुदायिक भागीदारी को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी ने दिया सामुदायिक संरक्षण का संदेश। सफाई अभियान में श्री गुगा जगहर पीर जी सेवा एवं जनकल्याण समिति और मत्स्य सहकारी सभा खटियाड़ की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने विभागीय कर्मचारियों के साथ मिलकर तालाब की सफाई में श्रमदान किया। समिति की ओर से भविष्य में भी जलस्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण से जुड़े अभियानों में हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया गया। अभियान से जुड़े लोगों ने कहा कि जलस्रोत किसी एक विभाग या संस्था की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों से है। इसलिए इनके संरक्षण के लिए सरकारी विभागों के साथ पंचायतों, सामाजिक संस्थाओं, स्थानीय समुदाय और आम नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। खटियाड़ के ऐतिहासिक तालाब से शुरू हुए इस अभियान ने क्षेत्र में स्वच्छता और जल संरक्षण को लेकर एक सकारात्मक संदेश दिया है। अभियान के दौरान लोगों से “मेरा जलस्रोत, मेरी जिम्मेदारी” की भावना के साथ अपने आसपास के जलस्रोतों को स्वच्छ रखने का आह्वान किया गया। मत्स्य विभाग का एक माह का यह विशेष अभियान जलस्रोतों की सफाई के साथ-साथ जलीय जीवन और स्थानीय पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

