सेवा में,
माननीय श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू जी
मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश सरकार
शिमला – 171002
विषय: हिमाचल प्रदेश को पूर्णतः नशा मुक्त बनाने हेतु समग्र एवं प्रभावी सुझाव।
महोदय,
सादर प्रणाम।
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान, विशेष पुलिस कार्रवाई, जनजागरूकता कार्यक्रम तथा नशा तस्करों के विरुद्ध की जा रही कठोर कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है। इसके बावजूद नशा तस्करी का बदलता स्वरूप और युवाओं में बढ़ती इसकी प्रवृत्ति अत्यंत चिंताजनक है। यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य, सामाजिक संरचना और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का प्रश्न है।
प्रदेशहित को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित सुझाव आपके समक्ष विनम्रतापूर्वक प्रस्तुत हैं—
1. कठोर एवं समयबद्ध कानूनी व्यवस्था
नशा तस्करी से संबंधित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष न्यायालय स्थापित किए जाएं। दोष सिद्ध होने पर कठोर दंड तथा नशे के कारोबार से अर्जित चल-अचल संपत्ति की अनिवार्य जब्ती सुनिश्चित की जाए। बड़े तस्करों एवं उनके आर्थिक नेटवर्क को प्राथमिकता के आधार पर समाप्त किया जाए।
2. शिक्षा के माध्यम से स्थायी समाधान
प्राथमिक कक्षाओं से लेकर महाविद्यालय स्तर तक नशे के दुष्परिणाम, नैतिक शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल और संविधान के प्रति नागरिक कर्तव्यों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए। प्रत्येक विद्यालय एवं महाविद्यालय में नियमित नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
3. ग्राम स्तर तक जनभागीदारी
पंचायतों, नगर निकायों, महिला मंडलों, युवक मंडलों, धार्मिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा पूर्व सैनिक संगठनों को नशा विरोधी अभियान से जोड़ा जाए। प्रत्येक पंचायत में “नशा मुक्त समिति” का गठन कर स्थानीय स्तर पर निगरानी और जागरूकता सुनिश्चित की जाए।
4. सूचना देने वालों की पूर्ण सुरक्षा
नशा तस्करी की सूचना देने वाले नागरिकों की पहचान हर परिस्थिति में गोपनीय रखी जाए। एक सुरक्षित डिजिटल हेल्पलाइन एवं गोपनीय शिकायत प्रणाली विकसित की जाए ताकि कोई भी व्यक्ति बिना भय के सूचना दे सके। आवश्यकता पड़ने पर सूचना देने वालों के लिए विधिसम्मत सुरक्षा तंत्र को और मजबूत किया जाए।
5. पुलिस विभाग में आंतरिक सतर्कता
समय-समय पर पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारियों की नशा तस्करों से संलिप्तता के मामले सामने आए हैं, जिन पर सरकार एवं विभाग ने कार्रवाई भी की है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए पुलिस विभाग में नियमित आंतरिक सतर्कता जांच, गोपनीय निरीक्षण, ईमानदारी परीक्षण तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाए। इससे जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
6. आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग
पुलिस को ड्रोन, डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर इंटेलिजेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स, आधुनिक निगरानी प्रणाली और अंतरराज्यीय सूचना साझा करने वाले नेटवर्क से सुसज्जित किया जाए। सीमावर्ती क्षेत्रों में तकनीकी निगरानी को और मजबूत किया जाए।
7. ईमानदार अधिकारियों को संरक्षण
जो पुलिस अधिकारी और कर्मचारी ईमानदारी एवं निष्पक्षता से कार्य कर रहे हैं, उन्हें किसी भी प्रकार के अनुचित राजनीतिक या बाहरी दबाव से मुक्त रखा जाए। कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को संस्थागत संरक्षण और प्रोत्साहन दिया जाए।
8. सरकारी संचार प्रणाली में पारदर्शिता
सरकारी कार्यों के लिए सुरक्षित आधिकारिक संचार माध्यमों का उपयोग अनिवार्य किया जाए। सभी आधिकारिक संवादों का विधिसम्मत डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़े। इस प्रक्रिया में संविधान, निजता के अधिकार तथा प्रचलित कानूनों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।
9. नशा पीड़ितों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान
नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को केवल अपराधी नहीं, बल्कि उपचार और पुनर्वास की आवश्यकता वाले व्यक्ति के रूप में भी देखा जाए। प्रत्येक जिले में आधुनिक नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों को सुदृढ़ किया जाए तथा उन्हें रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़ा जाए।
माननीय मुख्यमंत्री जी,
हिमाचल प्रदेश देवभूमि है। इसकी पहचान स्वच्छ समाज, संस्कार, शिक्षा और शांतिपूर्ण वातावरण से रही है। यदि सरकार, पुलिस, न्यायपालिका, शिक्षा विभाग, सामाजिक संगठन और आम नागरिक एक साझा मिशन के रूप में कार्य करें, तो निश्चित रूप से हिमाचल प्रदेश को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
आपके दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश इस दिशा में एक राष्ट्रीय उदाहरण स्थापित करे, यही प्रदेशवासियों की अपेक्षा है।
सादर।
भवदीय,
राम प्रकाश वत्स
सोशल मीडिया न्यूज
संपादक, न्यूज़ इंडिया आज तक
दिनांक: 22/07/2026

