Reading: हिमाचल प्रदेश बिलासपुर में PWD ने 11 भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों के लिए ₹28 करोड़ की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की, ताकि मानसून और बारिश में सड़क-नगर और जीवन-क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

हिमाचल प्रदेश बिलासपुर में PWD ने 11 भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों के लिए ₹28 करोड़ की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की, ताकि मानसून और बारिश में सड़क-नगर और जीवन-क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

RamParkash Vats
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हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में भूस्खलन की समस्या गंभीर रूप धारण कर चुकी है, जिससे स्थानीय निवासियों की सुरक्षा और जीवनयापन प्रभावित हो रहा है। इन खतरों को कम करने के लिए, राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) ने 11 “क्रॉनिक” भूस्खलन क्षेत्रों की पहचान की है और इन क्षेत्रों में जोखिम कम करने के लिए ₹28 करोड़ की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की है। यह पहल विशेष रूप से घुमारविन, बिलासपुर और झंडूत्ता क्षेत्रों में की गई है, जहां भूस्खलन की घटनाएँ बार-बार हो रही हैं ।

न DPRs में विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न संरचनात्मक उपायों का प्रस्ताव किया गया है, जिनमें ढलान स्थिरीकरण, रिटेनिंग दीवारों का निर्माण, जल निकासी प्रणालियों का सुधार और वृक्षारोपण के माध्यम से कटाव नियंत्रण शामिल हैं। उदाहरण स्वरूप, बगचाल पुल पर ₹4.7 करोड़, गलाही नाला पर ₹3.15 करोड़, झंडूत्ता-बडोली कल्लन सड़क पर ₹7.03 करोड़ और डाबला पंचायत में ₹98 लाख की परियोजनाएँ प्रस्तावित की गई हैं। इन उपायों का उद्देश्य भूस्खलन के कारण होने वाली क्षति को कम करना और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

यह पहल अक्टूबर 2025 में बलू घाट में हुए एक भीषण भूस्खलन के बाद की गई है, जिसमें 16 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना ने लोक निर्माण विभाग की भूस्खलन क्षेत्रों में सक्रियता पर सवाल उठाए थे। इस घटना के बाद, विभाग ने 540 दुर्घटना-प्रवण ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की और उनमें से 47 को सुधारने का कार्य शुरू किया है ।इसके अतिरिक्त, घुमारविन-बारथिन-शाहतलाई सड़क को 15 दिनों के लिए रात के समय बंद कर दिया गया है ताकि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह कदम भूस्खलन के जोखिम को कम करने और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और वर्षा की तीव्रता के कारण भूस्खलन एक गंभीर समस्या बन गई है। राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग की यह पहल इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो न केवल भूस्खलन के जोखिम को कम करने में मदद करेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों की सुरक्षा और जीवनस्तर में भी सुधार लाएगी।इस परियोजना की सफलता के लिए आवश्यक है कि सभी संबंधित विभागों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए और सभी उपायों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए। साथ ही, भविष्य में भूस्खलन की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए निरंतर निगरानी और सुधारात्मक उपायों की आवश्यकता होगी।

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