
सीतापुर, महमूदाबाद,24/09/2025 (राज्य चीफ ब्यूरो ,अनुज कुमार जैन)
जनपद सीतापुर के विकास क्षेत्र महमूदाबाद के प्राथमिक विद्यालय नदवा में बीएसए और प्रधानाध्यापक के बीच हुई हाथापाई का जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, उसने एक सामान्य प्रशासनिक विवाद को सामाजिक विस्फोट बना दिया है। वीडियो में प्रधानाध्यापक ब्रजेन्द्र कुमार वर्मा को बेल्ट से मारते हुए दिखाया गया है; घटना के बाद बीएसए कार्यालय की ओर से सदर कोतवाली में तहरीर दी गई और पुलिस ने प्रधानाध्यापक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत भेज दिया।

नीचे विस्तृत, सजीव और आक्रोश भरे शब्दों में पूरी घटना, स्थानीय प्रतिक्रिया और उससे निकले सवाल दिए जा रहे हैं — क्योंकि अगर नन्हे बच्चों को स्कूल के बाहर हड़ताल पर खड़ा होना पड़ रहा है, तो यह सीधे तौर पर शिक्षा व्यवस्था और उसकी जवाबदेही पर सीधा प्रश्न है।

घटना — वायरल वीडियो व प्राथमिकी
सूत्रों के अनुसार, प्रधानाध्यापक ब्रजेन्द्र कुमार वर्मा किसी मामले में अपना स्पष्टीकरण देने बीएसए कार्यालय पहुंचे थे। बातचीत गर्म हुई और मामला हाथापाई में बदल गया — यह पूरा घटनाक्रम कार्यालय की सीसीटीवी में कैद है और सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज ने स्थिति को और तूल दे दिया। बीएसए कार्यालय की तहरीर के आधार पर सदर कोतवाली ने मामला दर्ज कर प्रधानाध्यापक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

स्थानीय प्रतिक्रिया — आक्रोश, समर्थन और संदेह
शिक्षक समाज और ग्रामीणों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। कई लोग वायरल वीडियो को अधूरा बताते हुए पूरी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक ब्रजेन्द्र कुमार वर्मा का समर्थन करते हुए कहा है कि उनके कार्यकाल में विद्यालय में पढ़ाई व व्यवस्थाएँ सुधरी हैं।एक कड़वी वास्तविकता यह भी है कि स्थानीय लोगों ने सहायक अध्यापिका अवन्तिका गुप्ता पर विद्यालय से बार-बार अनुपस्थित रहने के आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि इसी मुद्दे को लेकर विवाद भड़का था।स्थानीय आक्रोश के बीच यह भी आवाज़ उठ रही है — “वीडियो के आधे हिस्से से कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए; पूरी सीसीटीवी फुटेज बताई जाए
विद्यालय पर प्रभाव — छात्र-शिक्षक रिश्ते पर गहरा असर
घटना का असर सीधे छात्रों पर पड़ा। बुधवार को विद्यालय में ताला लटका मिला; शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण कक्षाएँ रद्द रहीं। सुबह से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ विद्यालय के गेट पर खड़ी रही और अपने प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक की वापसी की ज़ोरदार माँग करती रहीं। स्थानीय पुलिस — जो बच्चों को समझाने गई — को भी बच्चों ने एकदम स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे तभी घर लौटेंगे जब उनके गुरुजी वापस आएँगे।
सोचिए — छोटे-छोटे बच्चे, जिनका अधिकार है पढ़ाई और सुरक्षा, अब अपने शिक्षक के वापस आने के लिये गेट पर खड़े हैं। क्या यह शिक्षा विभाग की सबसे बड़ी शर्म नहीं?
शिक्षा विभाग के लिए नक़ुशान और सवाल
यह घटना केवल एक व्यक्तिविशेष की विवाद नहीं है — यह स्थानीय शिक्षा व्यवस्था के संरक्षण, निगरानी और जवाबदेही के व्यापक प्रश्न को उभारती है:क्या स्कूलों में व्यवस्थापकीय और निगरानी तंत्र ठीक ढंग से काम कर रहे हैं?शिक्षक-अनुपस्थिति के आरोपों पर विभागने क्या कार्रवाई की थी, और क्यों यह मामला इतने बढ़ने तक टला नहीं?वीडियो वायरल होने पर स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच और सार्वजनिक व्याख्या की प्रक्रिया कहाँ है?सबसे नाजुक — बच्चों की पढ़ाई और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?यदि छोटे बच्चों को अपने शिक्षकों की वकालत के लिए विद्यालय बंद कर देना पड़ता है, तो दोष केवलउस एक घटना का नहीं; यह व्यवस्था के टूटने का संकेत है।
स्थानीय लोग और अभिभावक जो मांग कर रहे हैं, वे स्वाभाविक और औचित्यपूर्ण हैं:
- पूरी सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जाए — ताकि घटना का सच समक्ष आए और किसी तरह की महत्वाकांक्षी छंटनी से बचा जा सके।
- निष्पक्ष व त्वरित जांच हो — बाहरी समक्षता के साथ, ताकि विभागीय पक्षपात से बचा जा सके।
- जाँच के दौरान संवेदनशीलता बनाये रखें — बच्चों की पढ़ाई भंग न हो; तत्काल शिक्षा व्यवस्था बहाल की जाए।
- शिक्षक अनुपस्थिति के आरोपों की स्वतंत्र पड़ताल — अगर सहायक अध्यापिका की अनुपस्थिति की शिकायत सच है तो उस पर भी कार्रवाई आवश्यक।
- छात्रों के लिए काउंसलिंग व सुरक्षा उपाय — बच्चों के मनोवैज्ञानिक असर को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
जवाबदेही और पारदर्शिता की पुकार
यह केवल एक वायरल वीडियो का मामला नहीं; यह हमारी लोकशिक्षा प्रणाली के प्रति हमारी पहल और ज़िम्मेदारी का आकलन है। जब मासूम बच्चे अपने शिक्षा-अधिकारों के लिए धरना दें, तो यह वक्तव्य है कि कहीं न कहीं बड़ी लापरवाही हुई है — और वह लापरवाही केवल व्यक्ति-विशेष तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शिक्षा विभाग, स्थानीय प्रशासन और पुलिस — सबकी जवाबदेही बनती है कि वे निष्पक्ष जांच कराएँ, पूरी सच्चाई सार्वजनिक करें और जितनी जल्दी हो सके विद्यालयों में पढ़ाई का सुचारु संचालन बहाल करें।
अगर नन्हे बच्चों को अपनी पढ़ाई के लिये अभिभावक-शिक्षक के लौटने तक विद्यालय पर बैठना पड़ रहा है, तो यह हम सभी के लिए शर्म की बात है — और इसकी बजाय हमें शर्मिंदगी के बजाय ज़िम्मेदारी दिखानी होगी।

