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सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया रामायण उत्सव

RamParkash Vats
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विद्यार्थियों ने रामायण के प्रमुख प्रसंगों का किया सजीव मंचन, भारतीय संस्कृति, संस्कारों और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों का दिया संदेश

महमूदाबाद (सीतापुर) | राज्य चीफ ब्यूरो अनुज कुमार जैन।

सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल, महमूदाबाद में रामायण उत्सव हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने रामायण के विभिन्न प्रमुख प्रसंगों का सजीव एवं मनमोहक मंचन कर उपस्थित अतिथियों और दर्शकों को भावविभोर कर दिया। बच्चों की आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था, नैतिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, त्याग, सत्य, कर्तव्यनिष्ठा और मर्यादा के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

श्रीराम जन्म से रावण वध तक के प्रसंगों का मनमोहक मंचन

रामायण उत्सव के दौरान विद्यार्थियों ने भगवान श्रीराम के जन्म, सीता स्वयंवर, वनवास, माता सीता के हरण, हनुमान जी द्वारा लंका दहन तथा रावण वध जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाते हुए विद्यार्थियों ने अपने अभिनय, संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाओं से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह दर्शाया कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, धैर्य, अनुशासन और कर्तव्यपालन का अनुपम उदाहरण है। वहीं, माता सीता के चरित्र से धैर्य एवं दृढ़ संकल्प, लक्ष्मण से सेवा और समर्पण तथा हनुमान जी के जीवन से भक्ति, साहस और निष्ठा की प्रेरणा मिलती है।

रामायण के प्रसंगों ने दर्शकों को बुराई पर अच्छाई की विजय का शाश्वत संदेश भी दिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने यह स्पष्ट किया कि रामायण की शिक्षाएं आज भी जीवन में नैतिकता, सदाचार और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

गणमान्य अतिथियों ने की विद्यार्थियों की सराहना

कार्यक्रम में विद्यालय के चेयरमैन शिव कुमार गुप्ता, डायरेक्टर आशीष गुप्ता, चेयरपर्सन श्रीमती सीमा गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती श्रद्धा गुप्ता, हरिओम गुप्ता, प्रधानाचार्या श्रीमती सारिका वर्मा तथा पत्रकार संघ के अध्यक्ष अनुज कुमार जैन की गरिमामयी उपस्थिति रही।

सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रामायण के प्रसंगों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों की प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उन्हें भारतीय संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, रचनात्मकता और सामूहिक रूप से कार्य करने की भावना विकसित होती है। इसके साथ ही उन्हें भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को समझने और अपने जीवन में उसके सकारात्मक संदेशों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है।

संस्कारयुक्त शिक्षा से ही होगा सर्वांगीण विकास

विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती सारिका वर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस रामायण उत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं से परिचित कराना तथा उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सदाचार और कर्तव्यनिष्ठा की भावना विकसित करना रहा।

विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना भी है। सांस्कृतिक और धार्मिक प्रसंगों पर आधारित कार्यक्रम बच्चों को अपनी परंपराओं से जोड़ने के साथ जीवन में अच्छे संस्कार अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।

रामायण जैसे महाकाव्य विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर प्रदान करते हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना कितना महत्वपूर्ण है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, आदर्श नेतृत्व और कर्तव्यपालन की प्रेरणा देता है, जबकि रामायण के अन्य पात्र भी अपने आचरण और जीवन मूल्यों के माध्यम से अनेक शिक्षाएं प्रदान करते हैं।

रामायण केवल ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की प्रेरणा

रामायण उत्सव ने यह संदेश दिया कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आदर्श जीवन, मानवीय मूल्यों, कर्तव्य, त्याग और मर्यादा की अमूल्य धरोहर है। इसकी शिक्षाएं व्यक्ति को परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने की प्रेरणा देती हैं।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिला। बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को यह संदेश दिया कि संस्कारों से जुड़ी शिक्षा ही एक ऐसे समाज के निर्माण में सहायक हो सकती है, जहां सत्य, सद्भाव, सम्मान और नैतिकता को प्राथमिकता दी जाए।

इस प्रकार सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल में आयोजित रामायण उत्सव विद्यार्थियों की प्रतिभा, सांस्कृतिक चेतना और भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान को अभिव्यक्त करने वाला प्रेरणादायक आयोजन रहा।

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