56 वर्षों तक अंगद का किरदार निभाने वाले दर्शन कुमार अब मंच से विदा हो सकते हैं, लेकिन उनके अभिनय, समर्पण और रामलीला से जुड़े जीवन की स्मृतियां नूरपुर के लोगों के मन में लंबे समय तक जीवित रहेंगी। कभी-कभी किसी कलाकार की सबसे बड़ी उपलब्धि तालियों की गूंज नहीं, बल्कि वह सम्मान होता है, जो वर्षों की निष्ठा के बाद लोगों के दिलों में उसके लिए पैदा होता है।
75 वर्ष की उम्र, कमजोर होता स्वास्थ्य, लेकिन श्रीराम की लीला के प्रति समर्पण में कभी नहीं आई कमी; नूरपुर की रामलीला का एक भावुक अध्याय होगा समाप्त
नूरपुर से विनय महाजन——-किसी किरदार को एक-दो साल नहीं, बल्कि लगातार 56 वर्षों तक निभाना आसान नहीं होता। इसके लिए केवल अभिनय का हुनर ही नहीं, बल्कि अटूट लगन, गहरी आस्था और वर्षों तक निभाए गए वचन जैसा समर्पण भी चाहिए। नूरपुर के 75 वर्षीय दर्शन कुमार चौधरी की कहानी कुछ ऐसी ही है। पिछले 56 वर्षों से रामलीला के मंच पर अंगद की भूमिका निभाते आ रहे दर्शन कुमार अब इस किरदार को अंतिम बार निभाने के बाद विदाई लेने जा रहे हैं। उनके इस फैसले के साथ ही नूरपुर की रामलीला का एक ऐसा अध्याय समाप्त होने जा रहा है, जिसकी यादें वर्षों तक लोगों के दिलों में बसी रहेंगी।
नूरपुर शहर के नियाजपुर स्थित वार्ड नंबर 7 के निवासी दर्शन कुमार चौधरी राजा साहब दशहरा एवं रामलीला कमेटी के सबसे वरिष्ठ कलाकार हैं। आधी सदी से भी अधिक समय तक अंगद की भूमिका निभाकर उन्होंने इस किरदार को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लिया। हर साल रामलीला का मंच सजता, भगवान श्रीराम की कथा जीवंत होती और अंगद के रूप में दर्शन कुमार दर्शकों के सामने आते। समय बदलता रहा, पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन अंगद की भूमिका के प्रति उनका समर्पण बरकरार रहा।
रोजी-रोटी के संघर्ष के बीच भी नहीं छूटा रामलीला का साथ
दर्शन कुमार का जीवन केवल रामलीला के मंच तक सीमित नहीं है। वह अपने परिवार और आजीविका की जिम्मेदारियां निभाते हुए नूरपुर में साइकिल रिपेयरिंग का काम करते हैं और जनरल स्टोर भी चलाते हैं। दिनभर अपने काम में व्यस्त रहने के बावजूद रामलीला के प्रति उनका जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ।
एक ओर रोजमर्रा की जिंदगी की जिम्मेदारियां थीं, तो दूसरी ओर रामलीला के प्रति वर्षों पुराना लगाव। दर्शन कुमार ने दोनों के बीच संतुलन बनाते हुए इस परंपरा को लगातार आगे बढ़ाया। उनके लिए अंगद का किरदार महज एक भूमिका नहीं रहा, बल्कि जीवन का ऐसा हिस्सा बन गया, जिससे उनका भावनात्मक रिश्ता जुड़ गया।
75 वर्ष की उम्र में भी नहीं टूटा हौसला
उम्र के इस पड़ाव पर शरीर पहले जैसा साथ नहीं देता। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी जीवन की गति को प्रभावित करने लगती हैं। दर्शन कुमार के सामने भी ऐसी परिस्थितियां आईं, लेकिन खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने अंगद की भूमिका निभाने का सिलसिला जारी रखा।उनके लिए हर वर्ष रामलीला में उतरना केवल मंच पर अभिनय करना नहीं था, बल्कि उस परंपरा को निभाना था, जिससे वह अपने जीवन के 56 वर्ष जोड़ चुके थे। इतने लंबे समय तक एक ही किरदार को जीवंत बनाए रखना उनके समर्पण की कहानी खुद बयां करता है।
अब मंच से विदाई की घड़ी, लेकिन यादों में हमेशा जीवित रहेगा अंगद
दर्शन कुमार चौधरी का कहना है कि अब वह अंगद की भूमिका अंतिम बार निभाने के बाद इस जिम्मेदारी से मुक्त होने जा रहे हैं। यह निर्णय उनके लिए भी भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि जिस किरदार को उन्होंने 56 वर्षों तक अपने अभिनय से सजाया, उससे दूरी बनाना सहज नहीं होगा।जिस मंच पर उन्होंने जीवन के अनगिनत पल बिताए, जिस किरदार के साथ उनकी पहचान जुड़ी और जिस रामलीला से उनका वर्षों पुराना रिश्ता रहा, उससे विदाई लेना उनके जीवन का एक यादगार पड़ाव होगा।हो सकता है कि आने वाले वर्षों में रामलीला के मंच पर अंगद की भूमिका कोई दूसरा कलाकार निभाए, लेकिन दर्शन कुमार चौधरी के 56 वर्षों के योगदान की अपनी अलग पहचान रहेगी। उनकी जगह लेने वाला कलाकार किरदार को आगे बढ़ा सकता है, मगर उनके जीवन के साढ़े पांच दशकों से अधिक समय में जुड़ी यादों और अनुभवों की कहानी अपनी अलग ही होगी।
नगरवासियों ने जताया सम्मान, दीर्घायु जीवन की कामना की
राजा साहब दशहरा एवं रामलीला कमेटी के अध्यक्ष गौरव महाजन, नूरपुर नगर परिषद की अध्यक्ष नीति महाजन तथा नगर के अन्य लोगों ने दर्शन कुमार चौधरी के लंबे योगदान की सराहना की। उन्होंने रामलीला के प्रति उनके समर्पण और निरंतरता को सराहते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।दर्शन कुमार की यह यात्रा याद दिलाती है कि किसी परंपरा को जीवित रखने वाले लोग केवल कलाकार नहीं होते, बल्कि वे उस संस्कृति की जीवंत कड़ी होते हैं, जो एक पीढ़ी को दूसरी पीढ़ी से जोड़ती है।

