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कमनाला पंचायत की जांच समिति पर उठे सवाल, नई स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग

RamParkash Vats
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कमनाला पंचायत की जांच समिति पर उठे सवाल, फाउंडेशन ने निष्पक्ष जांच के लिए नई समिति गठित करने की मांग, प्रशासन से 15 दिनों में जांच पूरी करने की अपील

नूरपुर प्रशासन को सौंपा शिकायत पत्र, कमनाला पंचायत की कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग; फाउंडेशन बोला—पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए नई समिति जरूरी

नूरपुर रणजीत बख्शी जनकल्याण फाउंडेशन के निदेशक अकील बख्शी ने सोमवार को नूरपुर प्रशासन को एक शिकायती पत्र सौंपकर ग्राम पंचायत कमनाला में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए गठित वर्तमान समिति को तत्काल भंग कर नई स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की। अकील बख्शी ने संस्था के सदस्यों की मौजूदगी में नूरपुर एसडीएम कार्यालय में शिकायत पत्र सौंपा। उन्होंने बाद में जारी प्रेस नोट में कहा कि प्रशासन ने उनकी शिकायत को गंभीरता से सुना और मामले पर गौर करने का आश्वासन दिया है। फाउंडेशन का कहना है कि पंचायत से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ होना जरूरी है, ताकि किसी भी स्तर पर सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक समाधान हो सके।

अकील बख्शी ने आरोप लगाया कि विभाग की ओर से गठित वर्तमान जांच समिति की निष्पक्षता को लेकर संस्था के स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। उनका दावा है कि समिति के अध्यक्ष विजय पंजला के पिता ग्राम पंचायत कमनाला में वेंडर के रूप में जुड़े हुए हैं। फाउंडेशन ने इसी आधार पर जांच समिति की संरचना पर पुनर्विचार करने की मांग की है। हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। संस्था ने प्रशासन से मांग की है कि वर्तमान समिति को भंग कर क्षेत्र से बाहर के ऐसे अधिकारियों एवं सदस्यों को शामिल करते हुए नई जांच समिति बनाई जाए, जिनका पंचायत या संबंधित व्यक्तियों और वेंडरों से कोई प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष हित-संबंध न हो। बख्शी ने जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए संस्था के एक प्रतिनिधि को प्रत्येक चरण में शामिल करने, मौके पर होने वाली जांच और कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने तथा समिति में फॉरेंसिक विशेषज्ञ को शामिल करने की मांग भी रखी है।

फाउंडेशन ने मांग की है कि नई समिति का गठन तत्काल किया जाए और जांच को 15 दिनों के भीतर पूरा कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। अकील बख्शी के अनुसार, इन मांगों का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। वहीं, इस मामले में विकासखंड अधिकारी नूरपुर का कहना है कि यदि संस्था के सदस्य विभागीय जांच से संतुष्ट नहीं हैं तो किसी अन्य एजेंसी से भी जांच करवाई जा सकती है और इस संबंध में उन्हें पहले ही अवगत करवाया जा चुका है। ऐसे में अब मामला प्रशासन के स्तर पर आगे की कार्रवाई और शिकायत में लगाए गए आरोपों के सत्यापन से जुड़ा है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है और पंचायत से जुड़े वित्तीय मामलों में वास्तविक स्थिति क्या है।

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