जल शक्ति विभाग में NIELIT के जरिए तैनात 391 कर्मचारियों का अनुबंध समाप्त होने की कगार पर, बिना लिखित विस्तार के काम करने पर वेतन की जिम्मेदारी पर सवाल
मुख्यमंत्री सुक्खू विधानसभा में कह चुके हैं—आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य के लिए नीति बनाई जाएगी; अब कर्मचारी पूछ रहे हैं कि 30 सितंबर के बाद सरकार का अगला कदम क्या होगा

शिमला: हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जल शक्ति विभाग में NIELIT के माध्यम से आउटसोर्स आधार पर सेवाएं दे रहे करीब 400 कर्मचारियों की मौजूदा अनुबंध अवधि 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इनमें 268 डाटा एंट्री ऑपरेटर और 123 टेक्निकल सपोर्ट पर्सन शामिल हैं। यानी कुल संख्या 391 बनती है। अनुबंध अवधि समाप्त होने से पहले यदि सेवा विस्तार की औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो इन कर्मचारियों के सामने रोजगार जारी रहने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
मामले का अहम पहलू यह है कि सामने आई जानकारी के अनुसार NIELIT की ओर से विभाग को भेजे गए पत्र में संकेत दिया गया है कि अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद यदि कर्मचारी बिना औपचारिक एक्सटेंशन के काम करते हैं, तो उनके वेतन भुगतान की जिम्मेदारी कंपनी नहीं लेगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि 30 सितंबर के बाद केवल कार्यालय पहुंचकर काम करते रहना कर्मचारियों के लिए पर्याप्त नहीं होगा। उनकी सेवाएं जारी रखने के लिए विभाग और संबंधित एजेंसी की ओर से वैध एवं लिखित आदेश जरूरी होगा।
391 कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल
जल शक्ति विभाग में इन कर्मचारियों की भूमिका विभागीय कामकाज में महत्वपूर्ण बताई जाती है। डाटा एंट्री ऑपरेटरों से लेकर तकनीकी सहायता से जुड़े कर्मचारियों तक, आउटसोर्स व्यवस्था के तहत लंबे समय से सेवाएं ली जा रही हैं। लेकिन आउटसोर्स व्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या सेवा की स्थायी सुरक्षा को लेकर रही है।मौजूदा अनुबंध की समयसीमा अब समाप्त होने वाली है। ऐसे में कर्मचारियों की चिंता केवल नौकरी जारी रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि यदि वे विभाग के निर्देश पर काम करते रहते हैं और बाद में भुगतान को लेकर विवाद खड़ा होता है तो उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा।यही कारण है कि कर्मचारियों की नजर अब जल शक्ति विभाग और राज्य सरकार के अगले आदेश पर टिकी है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में नीति बनाने की बात कही थी
यह मामला इसलिए भी राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू विधानसभा में आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सरकार की नीति बनाने की बात कह चुके हैं।सरकार का तर्क रहा है कि प्रदेश के सभी लोगों को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है और आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर एक व्यवस्थित नीति की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री के इस बयान से आउटसोर्स कर्मचारियों में यह उम्मीद बनी थी कि लंबे समय से विभिन्न विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था मिल सकती है।लेकिन जल शक्ति विभाग में 30 सितंबर की समयसीमा सामने आने के बाद अब सरकार के सामने तत्काल निर्णय लेने की स्थिति है। कर्मचारियों के लिए यह जानना जरूरी है कि नीति कब आएगी और तब तक उनकी सेवाओं को किस व्यवस्था के तहत जारी रखा जाएगा।
नीति और तत्काल रोजगार—दो अलग सवाल
आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्या को केवल एक विभाग के अनुबंध से जोड़कर देखने के बजाय इसे राज्य में आउटसोर्स रोजगार व्यवस्था के बड़े सवाल के रूप में भी देखा जा रहा है।एक तरफ सरकार वित्तीय अनुशासन और आवश्यकता के आधार पर आउटसोर्स सेवाओं को नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी तरफ कई विभागों में वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि लगातार अनुबंध बढ़ने की व्यवस्था से उन्हें भविष्य की स्थिरता नहीं मिल पा रही है।ऐसे में सरकार की प्रस्तावित नीति और मौजूदा कर्मचारियों की तत्काल सेवा निरंतरता दोनों अलग-अलग विषय हैं। नीति बनने में समय लग सकता है, जबकि जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों के सामने 30 सितंबर की समयसीमा बेहद नजदीक है।
विपक्ष को मिल सकता है सरकार को घेरने का मुद्दा
आउटसोर्स कर्मचारियों का यह मामला राजनीतिक रूप से भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। विपक्ष पहले से ही रोजगार और सरकारी भर्तियों के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगता रहा है। यदि अनुबंध विस्तार में देरी होती है या कर्मचारियों की सेवाओं को लेकर कोई स्पष्ट आदेश समय पर जारी नहीं होता, तो विपक्ष इसे रोजगार नीति और सरकार के वादों से जोड़कर सवाल उठा सकता है।हालांकि अभी यह कहना सही नहीं होगा कि सभी 391 कर्मचारियों की नौकरी समाप्त हो चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मौजूदा स्थिति अनुबंध समाप्त होने और सेवा विस्तार को लेकर अनिश्चितता की है। अंतिम स्थिति सरकार अथवा जल शक्ति विभाग के औपचारिक आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।
कर्मचारियों की नजर अब 30 सितंबर पर
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए आने वाले कुछ दिन महत्वपूर्ण हैं। उन्हें सरकार से दो चीजों पर स्पष्टता की अपेक्षा है—पहली, 30 सितंबर के बाद उनकी सेवाएं जारी रहेंगी या नहीं; और दूसरी, यदि सेवाएं जारी रहती हैं तो वेतन भुगतान की जिम्मेदारी किस संस्था की होगी।सरकार यदि समय रहते लिखित आदेश जारी कर देती है तो कर्मचारियों की तत्काल चिंता दूर हो सकती है। वहीं यदि आदेश में देरी होती है तो कार्यालयों में काम जारी रखने वाले कर्मचारियों के वेतन को लेकर नई प्रशासनिक स्थिति पैदा हो सकती है।फिलहाल 30 सितंबर की तारीख नजदीक आने के साथ करीब 400 आउटसोर्स कर्मचारियों की निगाहें सरकार के फैसले पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में नीति बनाने की बात और दूसरी ओर मौजूदा अनुबंध की समाप्ति—इन दोनों के बीच अब सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि नीति बनने तक इन कर्मचारियों के रोजगार की व्यवस्था क्या होगी।

