संपादकीय लेख –संपादक राम प्रकाश वत्स
ओडिशा में मिले पांच नन्हे ओरांगुटान का मामला केवल वन्यजीव तस्करी का नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रजाति के अस्तित्व का सवाल है जिसकी तीनों ज्ञात प्रजातियां गंभीर विलुप्ति संकट में हैं। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पांचों को 8 सितंबर को बालासोर के जंगल से बचाया गया और फिलहाल नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में क्वारंटीन में रखा गया है। इंडोनेशिया ने उनकी उत्पत्ति की पुष्टि होने पर उन्हें वापस भेजने में सहयोग की इच्छा जताई है।

1. ओरांगुटान कितने बचे हैं?
आज जंगलों में लगभग:—-बोर्नियन ओरांगुटान: करीब 1,04,700—–सुमात्रन ओरांगुटान: करीब 13,846——तपनुली ओरांगुटान: 800 से कमयानी कुल मिलाकर लगभग 1.19 लाख जंगली ओरांगुटान बचे हैं। तीनों प्रजातियां IUCN की Critically Endangered/गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में हैं। खास तौर पर तपनुली ओरांगुटान दुनिया के सबसे दुर्लभ बड़े वानरों में है और इसकी संख्या 800 से भी कम मानी जाती है।
2. इनका रहने-सहन कैसा होता है?
ओरांगुटान को अक्सर “जंगल का आदमी” कहा जाता है। ये मुख्यतः इंडोनेशिया के सुमात्रा और बोर्नियो के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में पाए जाते हैं। इनके जीवन का अधिकांश हिस्सा पेड़ों पर गुजरता है। ये पेड़ों की शाखाओं पर झूलते हैं और रात में पत्तियों-टहनियों से घोंसला बनाकर सोते हैं।
इनका भोजन मुख्य रूप से:
फल—-कोमल पत्तियां——फूल—-पेड़ों की छाल—-कुछ कीड़े-मकोड़ेहोता है। ये जंगल में बीज फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए इन्हें जंगल का “गार्डनर” भी कहा जाता है।
3. इनकी संख्या इतनी कम क्यों हो गई?
सबसे बड़े कारण हैं:जंगलों की कटाई → खेती और पाम ऑयल के लिए जमीन → आवास का टूटना → अवैध शिकार → पालतू जानवरों का अवैध व्यापार।ओरांगुटान की एक और बड़ी कमजोरी है इसकी बहुत धीमी प्रजनन दर। मादा आम तौर पर एक बार में एक बच्चे को जन्म देती है और दो बच्चों के बीच लगभग 3–5 वर्ष का अंतर हो सकता है। बच्चा मां के साथ कई वर्षों तक रहता है। इसलिए आबादी में हुई छोटी-सी कमी को भी प्राकृतिक रूप से पूरा होने में बहुत समय लगता है।
4. इनकी आदतें कैसी होती हैं?
ओरांगुटान बहुत बुद्धिमान, जिज्ञासु और सीखने वाले जानवर हैं। दिलचस्प बात यह है कि वयस्क ओरांगुटान आम तौर पर अकेले रहना पसंद करते हैं। लेकिन मां और बच्चे का संबंध बेहद मजबूत होता है। बच्चे कई वर्षों तक अपनी मां से भोजन ढूंढना, पेड़ों पर चलना और सुरक्षित रहना सीखते हैं। इसीलिए 1–1.5 साल के पांच बच्चों को उनकी प्राकृतिक आबादी से अलग करके हजारों किलोमीटर दूर पाया जाना बेहद गंभीर मामला है।
5. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनका व्यापार प्रतिबंधित क्यों है?
ओरांगुटान की प्रमुख प्रजातियां CITES Appendix-I में सूचीबद्ध हैं। इसका मतलब है कि इनके अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक व्यापार पर अत्यंत कड़े प्रतिबंध हैं। बोर्नियन और सुमात्रन ओरांगुटान दोनों CITES Appendix-I में दर्ज हैं और तीनों महान वानर प्रजातियां अंतरराष्ट्रीय संरक्षण व्यवस्था के तहत अत्यधिक संरक्षित हैं। इसलिए ओडिशा में इनका मिलना यह सवाल खड़ा करता है कि ये भारत तक किस रास्ते से पहुंचे और इनके पीछे कौन-सा नेटवर्क था। फिलहाल उत्पत्ति की अंतिम पुष्टि DNA जांच से होनी है। भारतीय अधिकारियों के साथ STF और Wildlife Crime Control Bureau की जांच की खबरें सामने आई हैं।

6. तस्करी करने वाले को भारत में क्या सजा हो सकती है?
यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है। CITES स्वयं जेल की सजा तय नहीं करता; प्रत्येक देश अपने घरेलू कानून के तहत अपराध और सजा तय करता है।भारत में ऐसे मामले में Wild Life (Protection) Act, 1972 और परिस्थितियों के अनुसार विदेशी वन्यजीवों के आयात/व्यापार से जुड़े अन्य कानून लागू हो सकते हैं। संरक्षित वन्यजीवों से जुड़े गंभीर अपराधों में कानून के तहत 3 से 7 वर्ष तक की जेल और जुर्माना हो सकता है; दोबारा अपराध होने पर भी कठोर दंड का प्रावधान है। वास्तविक धाराएं इस बात पर निर्भर करेंगी कि जांच में पकड़ना, कब्जा, अवैध आयात, परिवहन, व्यापार या तस्करी में क्या-क्या साबित होता है।
ओडिशा के पांच ओरांगुटान मामले का सबसे बड़ा सवाल
मुख्य मुद्दा यह है कि ये पांचों बच्चे भारत आए कैसे?
इंडोनेशिया की प्रारंभिक आशंका है कि ये सुमात्रन मूल के हो सकते हैं, लेकिन DNA परीक्षण के बाद ही इसकी पुष्टि होगी। इंडोनेशिया ने इनके मूल देश में प्रत्यावर्तन की दिशा में सहयोग की पेशकश की है। इस मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि एक-डेढ़ साल के पांच बच्चे अकेले हजारों किलोमीटर की यात्रा करके ओडिशा के जंगल में नहीं पहुंच सकते। यदि तस्करी की पुष्टि होती है तो यह केवल पांच जानवरों की बरामदगी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचने का बड़ा सुराग हो सकता है।
संपादकीय नजरिए से मुख्य सवाल यही है—”जंगल के इन पांच मासूमों को उनकी मां और प्राकृतिक घर से कौन हजारों किलोमीटर दूर ले आया?”**

