संसदीय क्षेत्र कांगड़ा-चंबा | चीफ ब्यूरो — विनय महाजन | दिनांक: 31 अगस्त 2026
नूरपुर, हिमाचल प्रदेश– नूरपुर ब्लॉक कांग्रेस के मनोनीत अध्यक्ष संदेश डडवाल के कार्यकाल से जुड़ी पंचायत कमनाला की कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर समाज सेवक संस्था के चेयरमैन अकील बख्शी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। नूरपुर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बख्शी ने मनरेगा की करीब 390 दिहाड़ियों, पंचायत के विकास कार्यों और जसूर स्थित पंचायत समिति की दुकानों को लेकर कई आरोप लगाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।अकील बख्शी ने कहा कि उनकी प्रेस वार्ता का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं, बल्कि पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता, जनता के पैसे के इस्तेमाल और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े सवालों को सामने रखना है।
390 मनरेगा दिहाड़ियों पर उठे सवाल
बख्शी ने आरोप लगाया कि पंचायत कमनाला में मनरेगा की करीब 390 दिहाड़ियों में कथित तौर पर फर्जी हाजिरी दर्ज कर सरकारी धन का भुगतान लिया गया। उन्होंने विशेष रूप से बबीता डडवाल से जुड़े मनरेगा रिकॉर्ड की जांच की मांग उठाई।उन्होंने संबंधित विभाग से मस्टर रोल, हाजिरी रजिस्टर, कार्यस्थल की जियो-टैग तस्वीरों और भुगतान रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की। बख्शी का कहना है कि यदि जांच में फर्जी हाजिरी या सरकारी धन के गलत भुगतान की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।
निजी जमीन पर विकास कार्य करवाने का आरोप
अकील बख्शी ने संदेश डडवाल पर पंचायत प्रतिनिधि रहते हुए पंचायत कमनाला में कथित तौर पर अपनी निजी जमीन से संबंधित स्थानों पर विकास कार्य करवाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी धन से किए गए पंचायत कार्यों का प्रत्यक्ष लाभ किसी पंचायत प्रतिनिधि की निजी संपत्ति को मिला है तो इसकी भी रिकॉर्ड के आधार पर जांच होनी चाहिए।बख्शी ने कहा कि पंचायतों का उद्देश्य जनहित और क्षेत्र का विकास है, इसलिए सरकारी धन के इस्तेमाल में पूरी पारदर्शिता जरूरी है।
पंचायत समिति की दुकानों को लेकर भी सवाल
जसूर स्थित पंचायत समिति की कुछ दुकानों को लेकर भी बख्शी ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दुकानें संदेश डडवाल के नाम पर वर्षों से आवंटित हैं और कथित तौर पर उन्हें आगे अन्य व्यक्तियों को सबलेट किया गया।उन्होंने सवाल किया कि यदि पंचायत समिति की दुकान नियमों के तहत किसी व्यक्ति को आवंटित की गई है, तो क्या उसे आगे किसी तीसरे व्यक्ति को किराये पर देने अथवा आर्थिक लाभ लेने की अनुमति है। बख्शी ने मांग की कि दुकानों के आवंटन, किराये और कथित सबलेटिंग से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की जाए।
“गंभीर सवाल हैं तो निष्पक्ष जांच क्यों नहीं?”
बख्शी ने कहा कि मनरेगा दिहाड़ियों, पंचायत कमनाला के विकास कार्यों और जसूर की पंचायत समिति की दुकानों को लेकर यदि गंभीर शिकायतें और सवाल सामने आए हैं, तो संबंधित विभागों को रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और सरकारी धन को नुकसान पहुंचा है तो उसकी भी नियमानुसार वसूली होनी चाहिए।
मातृ-शिशु अस्पताल को लेकर 2 अक्टूबर की समय सीमा कायम
प्रेस वार्ता के दौरान अकील बख्शी ने मातृ-शिशु अस्पताल के मुद्दे पर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर उनके द्वारा पहले निर्धारित 2 अक्टूबर की समय सीमा बरकरार है। बख्शी ने कहा कि वह भविष्य में भी जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहेंगे और जनहित के मामलों पर अपनी आवाज मजबूती से बुलंद करेंगे।
अब पूरे मामले में संबंधित विभाग की जांच और संदेश डडवाल व अन्य संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

