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वोट की ताकत पर पहरा या लोकतंत्र की परीक्षा?

RamParkash Vats
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INDIA गठबंधन की महारैली में राहुल गांधी का तीखा हमला, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

नई दिल्ली EDITOR NEWS INDIA AAJTAK: लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का मताधिकार है। यही वह अधिकार है, जिसके माध्यम से एक सामान्य नागरिक देश की सत्ता के निर्माण में अपनी भूमिका निभाता है। लेकिन जब चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगें और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-काटने को लेकर राजनीतिक विवाद गहराने लगे, तो यह केवल सत्ता और विपक्ष के बीच की लड़ाई नहीं रह जाती, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय बन जाता है। दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली ने इसी सवाल को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया।लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रैली को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लंबे समय से वोटों की चोरी हो रही है और विभिन्न राज्यों के चुनावों के साथ 2024 के लोकसभा चुनाव में भी चुनावी अनियमितताएं हुई हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाएगा और उन्हें जेल जाना पड़ेगा।राहुल गांधी के इन बयानों ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। हालांकि, उनके आरोपों को चुनावी तथ्यों और स्वतंत्र जांच के आधार पर परखा जाना आवश्यक है। लोकतंत्र में किसी भी संवैधानिक संस्था की जवाबदेही महत्वपूर्ण है, लेकिन आरोपों की पुष्टि संवैधानिक प्रक्रिया और न्यायिक परीक्षण के माध्यम से ही होनी चाहिए।

चुनावी पारदर्शिता पर विपक्ष का सवाल

राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित कई राज्यों के चुनावों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और मतदाता सूचियों के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव को भी कथित अनियमितताओं से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए।कांग्रेस की विचारधारा के दृष्टिकोण से यह मुद्दा केवल चुनावी जीत-हार तक सीमित नहीं है। कांग्रेस लंबे समय से लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक बहुलता को अपनी वैचारिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताती रही है। ऐसे में मतदाता सूची की पारदर्शिता, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर विपक्ष की मांग राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बनती है।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी रैली में चुनावी प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हुआ है। उनके अनुसार, जब तक चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

विपक्षी एकजुटता की नई राजनीतिक तस्वीर

रामलीला मैदान की रैली में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और वामपंथी दलों के नेताओं की मौजूदगी ने विपक्षी एकजुटता का संदेश दिया।अखिलेश यादव ने भाजपा पर चुनावी लाभ के लिए मतदाता सूची में कथित हेरफेर करने के आरोप लगाए। वहीं ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। तेजस्वी यादव और वामपंथी नेताओं ने भी चुनावी पारदर्शिता तथा संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर अपनी बात रखी।यह एकजुटता केंद्र सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती प्रस्तुत करती है। हालांकि, विपक्षी गठबंधन की वास्तविक मजबूती केवल मंच साझा करने से नहीं, बल्कि साझा राजनीतिक कार्यक्रम, संगठनात्मक तालमेल और जनता के मुद्दों पर निरंतर संघर्ष से तय होगी।

लोकतंत्र में जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण

राहुल गांधी ने अपने भाषण में ‘शिव की बारात’ का उदाहरण देते हुए ऐसे भारत की कल्पना प्रस्तुत की, जहां हर वर्ग, हर समुदाय और हर व्यक्ति को समान अवसर मिले। उन्होंने किसानों, युवाओं और मजदूरों के अधिकारों की बात करते हुए आर्थिक असमानता पर भी निशाना साधा।यह संदेश कांग्रेस की उस राजनीतिक विचारधारा से जुड़ता है, जिसमें सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और समावेशी विकास को महत्व दिया जाता है। कांग्रेस का तर्क है कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने की व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता को सम्मान, अधिकार और अवसर प्रदान करने वाली शासन प्रणाली है।विपक्ष की यह महारैली ऐसे समय में हुई है, जब देश की राजनीति में चुनावी प्रक्रिया, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और सत्ता-विपक्ष के संबंधों को लेकर बहस तेज है। राहुल गांधी के आरोपों और विपक्ष की मांगों का राजनीतिक प्रभाव आने वाले समय में सामने आएगा।लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि क्या देश की चुनावी व्यवस्था पर जनता का विश्वास और मजबूत हो सकेगा? लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है कि चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह हो। विपक्ष के आरोपों की जांच हो, चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों के प्रति जवाबदेह रहे और जनता के मताधिकार की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बने।क्योंकि लोकतंत्र में सत्ता का असली मालिक कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि देश का मतदाता होता है।

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