डीबीटी से किसानों के खातों में पहुंचेगी सहायता राशि दुग्ध उत्पादकों को राहत: सुक्खू सरकार ने दोगुनी की दूध प्रोत्साहन राशि, पशुपालकों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने पर जोर

हिमाचल प्रदेश की मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों और पशुपालकों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से दूध प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली राशि को तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर करने का निर्णय लिया है। प्रदेश मंत्रिमंडल ने 10 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में इस वृद्धि को मंजूरी दी। इस फैसले से पात्र दुग्ध उत्पादकों को पहले की तुलना में दोगुनी प्रोत्साहन राशि मिल सकेगी। सरकार की इस योजना का उद्देश्य पशुपालन को ग्रामीण परिवारों की आय का स्थायी साधन बनाने और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना है।
दूध प्रोत्साहन राशि तीन से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर
राज्य सरकार की दूध प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत पहले पात्र दुग्ध उत्पादकों को प्रति लीटर तीन रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती थी। अब इसे बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर करने का निर्णय लिया गया है। यह सहायता निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करने वाले और पंजीकृत सहकारी संस्थाओं से जुड़े उन पशुपालकों को मिलेगी, जो संबंधित दुग्ध संग्रहण व्यवस्था के माध्यम से दूध की आपूर्ति करते हैं।इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों को दूध उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना और उनकी आय में अतिरिक्त सहायता प्रदान करना है। ग्रामीण हिमाचल प्रदेश में अनेक परिवार खेती के साथ-साथ गाय-भैंस पालन पर निर्भर हैं। ऐसे परिवारों के लिए दूध की नियमित बिक्री घरेलू खर्च, पशुओं के चारे, देखभाल और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने का महत्वपूर्ण साधन है।प्रोत्साहन राशि दोगुनी होने से पात्र किसानों को दूध की आपूर्ति के आधार पर अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा। हालांकि, वास्तविक लाभ की राशि प्रत्येक पशुपालक द्वारा आपूर्ति किए गए दूध की मात्रा और योजना के तहत उसकी पात्रता पर निर्भर करेगी।
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से होगा भुगतान
सरकार ने दूध प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत भुगतान के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी डीबीटी व्यवस्था अपनाई है। इस प्रणाली के माध्यम से पात्र लाभार्थियों की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके पंजीकृत बैंक खातों में भेजी जाती है।योजना के डिजिटल तंत्र में दुग्ध सहकारी समितियों द्वारा दूध की आपूर्ति से संबंधित विवरण दर्ज किए जाते हैं। संबंधित विभाग निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इन विवरणों का सत्यापन करता है। इसके बाद पात्रता और आपूर्ति के आधार पर देय प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाता है।इस व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने, अभिलेखों को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और लाभार्थियों को भुगतान की जानकारी उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है। योजना से जुड़े किसान अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से ओटीपी आधारित लॉगिन की सहायता से दूध की आपूर्ति, भुगतान और प्रोत्साहन राशि से संबंधित विवरण भी देख सकते हैं।डीबीटी व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि सरकारी सहायता सीधे लाभार्थी तक पहुंचती है। इससे भुगतान संबंधी जानकारी प्राप्त करना आसान होता है और प्रत्येक पात्र किसान को मिलने वाली राशि का रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है।
गाय और भैंस के दूध के खरीद मूल्य में भी वृद्धि
हिमाचल प्रदेश सरकार ने दूध प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के साथ-साथ दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि की व्यवस्था भी की है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में गाय के दूध का खरीद मूल्य 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का खरीद मूल्य 61 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर करने की घोषणा की गई है।इन दरों का उद्देश्य पशुपालकों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य उपलब्ध कराना और दुग्ध उत्पादन को आर्थिक रूप से अधिक उपयोगी बनाना है। इसके साथ ही सरकार ने प्राकृतिक ए-2 दूध की जांच, ब्रांडिंग और हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन के माध्यम से खरीद की व्यवस्था को भी प्रोत्साहित करने की बात कही है।दूध के खरीद मूल्य और प्रोत्साहन राशि को अलग-अलग समझना आवश्यक है। खरीद मूल्य वह राशि है, जिस पर संबंधित व्यवस्था के अंतर्गत दूध खरीदा जाता है, जबकि प्रोत्साहन राशि योजना की पात्रता शर्तों के अनुसार अतिरिक्त सरकारी सहायता होती है। इसलिए प्रत्येक किसान को मिलने वाली कुल राशि उसके दूध की गुणवत्ता, खरीद व्यवस्था और योजना के नियमों के अनुसार निर्धारित होगी।
सरकारी विभागों की खरीद में मिल्कफेड को प्राथमिकता
10 अक्टूबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने सरकारी विभागों को दूध और दुग्ध उत्पादों की खरीद हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन यानी मिल्कफेड से करने के निर्देश देने का भी निर्णय लिया।इस कदम का उद्देश्य राज्य की दुग्ध सहकारी व्यवस्था को मजबूत करना और स्थानीय दुग्ध उत्पादकों के लिए बाजार की उपलब्धता बढ़ाना है। यदि सरकारी संस्थानों की मांग मिल्कफेड के माध्यम से नियमित रूप से पूरी होती है, तो इससे दुग्ध प्रसंस्करण, संग्रहण और विपणन व्यवस्था को सहारा मिल सकता है।दुग्ध क्षेत्र में केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। उत्पादित दूध का समय पर संग्रहण, गुणवत्ता की जांच, उचित मूल्य निर्धारण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच भी महत्वपूर्ण है। सरकारी खरीद व्यवस्था को सहकारी संस्थाओं से जोड़ने का उद्देश्य इसी पूरी प्रक्रिया को मजबूत करना है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार को मिल सकता है प्रोत्साहन
हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है। विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए गाय-भैंस पालन खेती के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर प्रदान करता है। महिलाओं की भागीदारी भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, क्योंकि पशुओं की देखभाल, दुहाई और दूध की आपूर्ति से जुड़े अनेक कार्य ग्रामीण परिवारों की महिलाएं संभालती हैं।दूध प्रोत्साहन राशि में वृद्धि से पात्र पशुपालकों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी। इससे पशुओं के पोषण, चारे और देखभाल पर होने वाले खर्च को पूरा करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, दुग्ध सहकारी समितियों की सदस्यता और दूध की नियमित आपूर्ति को बढ़ावा मिलने की संभावना है।हालांकि, योजना का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि पात्र किसानों को बढ़ी हुई राशि कितनी नियमितता से मिलती है, दूध की खरीद व्यवस्था कितनी सुचारु रहती है और पशुपालन की लागत में होने वाली वृद्धि के मुकाबले उनकी आय में कितना सुधार होता है।
बजट और वित्तीय प्रावधान के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य
दूध प्रोत्साहन योजना की राशि बढ़ाने के निर्णय के साथ बजट संबंधी आंकड़ों को भी सही संदर्भ में प्रस्तुत करना आवश्यक है। हिमाचल प्रदेश के वित्त वर्ष 2026-27 के बजट भाषण में इस योजना के तहत तीन रुपये से छह रुपये प्रति लीटर की वृद्धि और किसानों के खातों में लगभग 11 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित करने का अनुमान दर्ज है।14 करोड़ रुपये के बजट संबंधी आंकड़े की अलग से आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो पाई है। इसलिए समाचार प्रकाशित करते समय इस राशि को अंतिम स्वीकृत बजट बताने से पहले संबंधित विभाग की अधिसूचना अथवा आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति से इसकी पुष्टि करना उचित होगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार का दूध प्रोत्साहन तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर करने का निर्णय पात्र दुग्ध उत्पादकों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता का प्रावधान करता है। दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि, डीबीटी के माध्यम से भुगतान और सरकारी विभागों की खरीद को मिल्कफेड से जोड़ने जैसे कदम राज्य के दुग्ध क्षेत्र को मजबूत करने की व्यापक नीति का हिस्सा हैं।अब इस पहल का लाभ पात्र पशुपालकों तक समय पर पहुंचाना, भुगतान व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखना और दुग्ध संग्रहण एवं विपणन की सुविधाओं को बेहतर करना महत्वपूर्ण होगा। इन व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण परिवारों की आय को सहारा देने तथा हिमाचल प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

