हिमाचल में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मिलेगी नई गति, शहरी निकायों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को मिलेगा प्रशिक्षण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा जनभागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर
स्थानीय निकायों के नेतृत्व एवं संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ

नूरपुर से विनय महाजन:-हिमाचल प्रदेश में शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ, सुंदर, व्यवस्थित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शहरी विकास विभाग तथा हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) की संयुक्त पहल प्रोजेक्ट सर्कुलर भारत के अंतर्गत प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशिक्षित कर उन्हें आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सक्षम बनाना है। यह पहल स्वच्छता, जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ शहरी विकास को नई दिशा प्रदान करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के सभी शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसका उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, उसके उचित वर्गीकरण, पुनर्चक्रण तथा उपयोगी संसाधनों की पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा देना है। इससे न केवल शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
शहरी विकास एवं लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों को उनकी स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रभावी कदम उठाने में सक्षम बनाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रोजेक्ट सर्कुलर भारत के अंतर्गत संचालित यह पहल स्थानीय निकायों के नेतृत्व को मजबूत करने और स्वच्छ, सुव्यवस्थित तथा पर्यावरण-अनुकूल शहरी क्षेत्रों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

वहीं, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य जनशक्ति, रूपांतरण एवं सतत विकास अधिकारी बी.पी. बिद्दप्पा ने कहा कि प्रोजेक्ट सर्कुलर भारत का उद्देश्य चक्रीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करना, अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ करना तथा संसाधनों के पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है। हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ यह साझेदारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
शहरी विकास विभाग के निदेशक नीरज कुमार ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्थानीय निकायों के नेतृत्व और संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करना, अपशिष्ट प्रबंधन के व्यावहारिक समाधानों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना तथा नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना इस पहल के प्रमुख लक्ष्य हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ जनसहयोग भी आवश्यक है।
कार्यक्रम के तहत शहरी विकास विभाग का निदेशालय और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड की प्रोजेक्ट सर्कुलर भारत पहल चक्रीय अर्थव्यवस्था एवं संसाधन पुनर्प्राप्ति के क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगी। प्रशिक्षण में कचरे के उत्पादन में कमी लाने, घरों एवं प्रतिष्ठानों में स्रोत स्तर पर कचरे को अलग-अलग रखने, उसके व्यवस्थित संग्रहण, प्रसंस्करण, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सामूहिक जनहित की दृष्टि से यह पहल स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि स्थानीय निकाय, प्रशासन, जनप्रतिनिधि, व्यापारिक प्रतिष्ठान और आम नागरिक मिलकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं, तो कचरे की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्वच्छ शहर केवल प्रशासनिक व्यवस्था से नहीं, बल्कि नागरिकों की जागरूकता और सामूहिक सहभागिता से बनते हैं। ऐसे में यह कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार शहरी विकास की संस्कृति को मजबूत करने में उपयोगी साबित हो सकता है।

