महामंडलेश्वर सतीश वत्स ने भक्तों को दिया कर्म, संतोष और आत्मिक शांति का संदेश

नूरपुर से विनय महाजन:नूरपुर। पतित पावन सिद्धाश्रम गद्दी सिद्ध बाबा शिब्बोथान भरमाड़ में शनिवार को संक्रांति के पावन अवसर पर सत्संग सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान महामंडलेश्वर सतीश वत्स ने अपने प्रवचनों के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया और जीवन में अच्छे कर्मों, संतोष तथा मानसिक संतुलन के महत्व पर प्रकाश डाला।महामंडलेश्वर सतीश वत्स ने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में जैसे कर्म करता है, उसी के अनुरूप उसे सुख-दुख का अनुभव होता है। प्रकृति का विधान और प्रारब्ध जीवन की परिस्थितियों को प्रभावित करते हैं, लेकिन उन परिस्थितियों में मनुष्य की प्रतिक्रिया, सहनशीलता और मानसिक स्थिति उसकी सोच तथा दृष्टिकोण पर निर्भर करती है। इसलिए जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना धैर्य, विवेक और सकारात्मक विचारों के साथ करना चाहिए।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के गीता उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चा सुख और शांति तभी प्राप्त होती है, जब मनुष्य सुख-दुख, लाभ-हानि तथा जय-पराजय की परिस्थितियों में अपने मन का संतुलन बनाए रखता है। जीवन में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं, लेकिन आत्मविश्वास, संयम और आध्यात्मिक चिंतन मनुष्य को कठिन समय में भी सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।महामंडलेश्वर ने कहा कि ईश्वर किसी के साथ भेदभाव नहीं करते। उनकी बनाई हुई सृष्टि और प्रत्येक प्राणी उनके प्रेम की अभिव्यक्ति है। जीवन में आने वाले सुख-दुख को केवल ईश्वर की सजा या उनकी कृपा में कमी के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि आत्मचिंतन करते हुए अपने कर्मों, व्यवहार और विचारों को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि मनुष्य को सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए, दूसरों के प्रति प्रेम और सद्भाव रखना चाहिए तथा विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोना चाहिए। संतोष, सेवा, सदाचार और आत्मिक शांति ही जीवन को सार्थक बनाने के प्रमुख आधार हैं।सत्संग सम्मेलन के दौरान श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाई। संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम ने उपस्थित भक्तों को आत्मचिंतन करने तथा जीवन में सकारात्मकता अपनाने की प्रेरणा दी।

