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कश्यप के सपा में जाने से भाजपा में हलचल, तीन नाराज नेताओं से मिले योगी आदित्यनाथ, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले डैमेज कंट्रोल की कोशिशें तेज

RamParkash Vats
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यूपी भाजपा में असंतोष की चर्चा के बीच योगी सक्रिय, वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर साधने की कोशिश, 2027 से पहले सियासी समीकरण दुरुस्त करने की कवायद तेज

    लखनऊ:उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के भीतर सियासी हलचल तेज होती नजर आ रही है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराज नेताओं से संवाद बढ़ाया है। राजनीतिक गलियारों में इन मुलाकातों को आगामी चुनाव से पहले संगठनात्मक असंतोष दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    सूत्रों के हवाले से सामने आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, धर्मेंद्र कश्यप अपनी बेटी कीर्ति कश्यप के साथ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले और सपा में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम ने भाजपा के भीतर उन नेताओं को लेकर चर्चाओं को बढ़ा दिया है, जो अपने परिवार के सदस्यों के राजनीतिक भविष्य और पार्टी में उचित प्रतिनिधित्व को लेकर असंतुष्ट बताए जा रहे हैं।

    तीन अहम मुलाकातों से सियासी संदेश

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल के दिनों में पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर और उनके परिवार, भाजपा की वरिष्ठ नेता रीता बहुगुणा जोशी तथा बुंदेलखंड के वरिष्ठ नेता गंगाचरण राजपूत से मुलाकात की है। इन मुलाकातों को पार्टी के भीतर नाराजगी कम करने और वरिष्ठ नेताओं के साथ संवाद बनाए रखने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

    कौशल किशोर के परिवार में उनके बेटे विकास किशोर की राजनीतिक भूमिका और भविष्य को लेकर चर्चाएं रही हैं। वहीं, रीता बहुगुणा जोशी के बेटे को वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद उनकी नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। गंगाचरण राजपूत के परिवार का भी बुंदेलखंड की राजनीति में प्रभाव माना जाता है।

    टिकट और राजनीतिक सम्मान बना चर्चा का विषय

    राजनीतिक सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में भाजपा के भीतर असंतोष की प्रमुख वजहों में वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक भूमिका, उनके परिवार के सदस्यों को अवसर देने की मांग और संगठन में सम्मान का सवाल शामिल बताया गया है। हालांकि, इन सभी मुद्दों पर संबंधित नेताओं के बीच किसी एक समान रुख या अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    2027 से पहले संगठन को एकजुट रखने की चुनौती

    उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के लिए संगठनात्मक एकजुटता महत्वपूर्ण मुद्दा है। धर्मेंद्र कश्यप के सपा में जाने के बाद विपक्ष को भाजपा के असंतुष्ट नेताओं के बीच अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने का अवसर मिल सकता है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातों को पार्टी के भीतर संवाद बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    फिलहाल इन बैठकों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष कितना कम हुआ है और टिकट वितरण को लेकर क्या निर्णय होंगे, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। इतना जरूर है कि 2027 के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और भाजपा के भीतर नेताओं की नाराजगी तथा उसे दूर करने के प्रयास चर्चा के केंद्र में हैं।

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