
डॉ. श्वेता भाटिया ने कुछ दिन पहले इस अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। इससे अब बच्चों के उपचार के लिए लोगों को पहले की तरह दूसरे अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। खासकर नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के उपचार में यह नियुक्ति महत्वपूर्ण साबित हो सकती है और प्राइवेट सेक्टर में भी इस पर अंकुश लगेगाl
नूरपुर अस्पताल में पिछले काफी समय से शिशु रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त होने के कारण बच्चों के उपचार में परेशानी आ रही थी। गंभीर स्थिति में बच्चों को टांडा मेडिकल कॉलेज या पठानकोट के अस्पतालों में ले जाना पड़ता था। अब विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती से बच्चों की जांच, बीमारी की पहचान और उपचार के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध होगी l सिविल नागरिक नूरपुर अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के सिजेरियन ऑपरेशन भी किए जाते हैं। ऐसे में प्रसव के बाद यदि नवजात शिशु को सांस लेने में परेशानी, कम वजन या अन्य स्वास्थ्य समस्या होती है, तो उसे तत्काल चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। शिशु रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता से ऐसे मामलों में बच्चे की जांच और शुरुआती उपचार समय पर शुरू करने में मदद मिलेगी।
पहले विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण नवजात की स्थिति को देखते हुए परिजनों को दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। इससे उन्हें मानसिक परेशानी के साथ आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता था। अब नूरपुर में शिशु रोग विशेषज्ञ के आने से स्थानीय स्तर पर बच्चों के उपचार की सुविधा मजबूत होगी। नवजातों को वार्मर या इन्क्यूबेटर में रखने तथा गंभीर नवजात देखभाल की सुविधाओं की उपलब्धता अस्पताल में मौजूद उपकरणो होने के चलते बेहतर ढंग से मिलेगी!
दो स्त्री रोग विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक और शिशु रोग विशेषज्ञ ने संभाला कार्यभार
प्रदेश सरकार ने हाल ही में नूरपुर अस्पताल में दो स्त्री रोग विशेषज्ञ, दो शिशु रोग विशेषज्ञ और एक मनोचिकित्सक की तैनाती के आदेश जारी किए थे। इनमें दोनों स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक मनोचिकित्सक और अब एक शिशु रोग विशेषज्ञ ने कार्यभार संभाल लिया है। दूसरे शिशु रोग विशेषज्ञ के कार्यभार संभालने से अस्पताल में बच्चों के उपचार की सेवाओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अनुपमा शर्मा ने बताया कि डॉ. श्वेता भाटिया ने शिशु रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यभार संभाल लिया है।
**50 बिस्तरों वाले एमसीएच भवन के संचालन की बढ़ी उम्मीद
नूरपुर में 50 बिस्तरों वाले मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच) का भवन तैयार है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण इसे पूरी क्षमता से संचालित करने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति से अब एमसीएच के संचालन की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, इसे पूरी तरह शुरू करने के लिए अन्य आवश्यक चिकित्सकों, स्टाफ और सुविधाओं की उपलब्धता भी जरूरी होगी।
नूरपुर अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 34 पद स्वीकृत हैं, । अस्पताल में प्रतिदिन 500 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। नूरपुर के अलावा आसपास के कई क्षेत्रों के लोग भी इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती को स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।तथा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल और पूर्व विधायक अजय महाजन का आभार जताया है।शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती से लोगों को राहत मिली है, लेकिन अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी का मुद्दा अभी भी बना हुआ है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संस्थाओं का कहना है कि नूरपुर जैसे बड़े अस्पताल में सभी आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि मरीजों को जांच और उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभागरेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति करने तथा मातृ एवं शिशु अस्पताल को पूरी सुविधाओं के साथ शुरू करने की मांग की है।

