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ऑटिज्म में स्टेम सेल थेरेपी पर सरकार का सख्त रुख

RamParkash Vats
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नई दिल्ली, 17 सितंबर2026 /NIIAT: केंद्र सरकार ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने साफ किया है कि ऑटिज्म के लिए स्टेम सेल उपचार केवल विधिवत मंजूर क्लिनिकल ट्रायल में ही किया जा सकेगा।

सरल शब्दों में कहें तो ऑटिज्म के इलाज के नाम पर स्टेम सेल थेरेपी को सामान्य इलाज या निजी क्लिनिक की नियमित सेवा के रूप में नहीं दिया जा सकता। जब तक किसी उपचार को संबंधित नियामक संस्थाओं से मंजूरी नहीं मिलती, तब तक उसे मरीजों पर सामान्य उपचार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह जारी की है, जहां क्लिनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 लागू है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 30 जनवरी 2026 के फैसले के बाद उठाया गया है।

मंत्रालय ने कहा है कि स्टेम सेल थेरेपी को सामान्य चिकित्सा सेवा के रूप में केवल उन्हीं बीमारियों या स्थितियों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें सरकार की स्वीकृत सूची में शामिल किया गया है।

ऑटिज्म के मामले में क्या नियम है?

ऑटिज्म में किसी भी तरह की स्टेम सेल थेरेपी को आईसीएमआर और डीबीटी की स्टेम सेल रिसर्च संबंधी राष्ट्रीय गाइडलाइन, 2017 और अन्य लागू सरकारी नियमों के अनुसार केवल स्वीकृत क्लिनिकल ट्रायल तक सीमित रखा गया है।

इसका मतलब है कि यदि किसी क्लिनिक या संस्था द्वारा ऑटिज्म के इलाज के नाम पर बिना उचित मंजूरी के स्टेम सेल उपचार दिया जाता है, उसका प्रचार किया जाता है या मरीजों को इसके लिए प्रेरित किया जाता है, तो कार्रवाई हो सकती है।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने भी 5 सितंबर 2026 की अपनी सलाह में स्पष्ट किया है कि स्वीकृत स्थितियों के अलावा स्टेम सेल थेरेपी का अनधिकृत इस्तेमाल, डॉक्टर द्वारा लिखना, प्रचार या विज्ञापन करना व्यावसायिक अवचार माना जा सकता है।

सरकार ने राज्यों और जिला स्तर के नियामक अधिकारियों से नियमों का कड़ाई से पालन कराने को कहा है। नियमों का उल्लंघन होने पर चिकित्सक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ संबंधित कानूनों के तहत पंजीकरण रद्द करने और जुर्माने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

सरकार का मुख्य संदेश स्पष्ट है—ऑटिज्म के नाम पर बिना वैज्ञानिक और नियामक मंजूरी वाली स्टेम सेल थेरेपी को सामान्य इलाज के रूप में नहीं दिया जा सकता।

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